ख्वाब Poetry (page 98)
कोई माज़ी के झरोकों से सदा देता है
अहमद राही
कभी तिरी कभी अपनी हयात का ग़म है
अहमद राही
कभी हयात का ग़म है कभी तिरा ग़म है
अहमद राही
ग़म-ए-हयात में कोई कमी नहीं आई
अहमद राही
सफ़र और हम-सफ़र
अहमद नदीम क़ासमी
रूह लबों तक आ कर सोचे
अहमद नदीम क़ासमी
क़यामत
अहमद नदीम क़ासमी
वो कोई और न था चंद ख़ुश्क पत्ते थे
अहमद नदीम क़ासमी
उम्र भर उस ने इसी तरह लुभाया है मुझे
अहमद नदीम क़ासमी
शुऊर में कभी एहसास में बसाऊँ उसे
अहमद नदीम क़ासमी
मैं किसी शख़्स से बेज़ार नहीं हो सकता
अहमद नदीम क़ासमी
लब-ए-ख़ामोश से इफ़्शा होगा
अहमद नदीम क़ासमी
जाने कहाँ थे और चले थे कहाँ से हम
अहमद नदीम क़ासमी
गो मिरे दिल के ज़ख़्म ज़ाती हैं
अहमद नदीम क़ासमी
एहसास में फूल खिल रहे हैं
अहमद नदीम क़ासमी
दावा तो किया हुस्न-ए-जहाँ-सोज़ का सब ने
अहमद नदीम क़ासमी
अंदाज़ हू-ब-हू तिरी आवाज़-ए-पा का था
अहमद नदीम क़ासमी
नींदों में फिर रहा हूँ उसे ढूँढता हुआ
अहमद मुश्ताक़
हिज्र इक वक़्फ़ा-ए-बेदार है दो नींदों में
अहमद मुश्ताक़
ज़ुल्फ़ देखी वो धुआँ-धार वो चेहरा देखा
अहमद मुश्ताक़
ये कौन ख़्वाब में छू कर चला गया मिरे लब
अहमद मुश्ताक़
था मुझ से हम-कलाम मगर देखने में था
अहमद मुश्ताक़
शाम-ए-ग़म याद है कब शम्अ' जली याद नहीं
अहमद मुश्ताक़
सफ़र नया था न कोई नया मुसाफ़िर था
अहमद मुश्ताक़
रौशनी रहती थी दिल में ज़ख़्म जब तक ताज़ा था
अहमद मुश्ताक़
रात फिर रंग पे थी उस के बदन की ख़ुशबू
अहमद मुश्ताक़
पानी में अक्स और किसी आसमाँ का है
अहमद मुश्ताक़
मोनिस-ए-दिल कोई नग़्मा कोई तहरीर नहीं
अहमद मुश्ताक़
मलाल-ए-दिल से इलाज-ए-ग़म-ए-ज़माना किया
अहमद मुश्ताक़
किस शय पे यहाँ वक़्त का साया नहीं होता
अहमद मुश्ताक़