ख्वाब Poetry (page 97)

ज़माना हो गया है ख़्वाब देखे

अहमद शनास

ज़माना हो गया है ख़्वाब देखे

अहमद शनास

यहाँ हर लफ़्ज़ मअनी से जुदा है

अहमद शनास

तसव्वुर को जगा रक्खा है उस ने

अहमद शनास

सुब्ह-ए-वजूद हूँ कि शब-ए-इंतिज़ार हूँ

अहमद शनास

फूलों में एक रंग है आँखों के नीर का

अहमद शनास

मोहब्बतों को कहीं और पाल कर देखो

अहमद शनास

मेरी रातों का सफ़र तूर नहीं हो सकता

अहमद शनास

रातों को जागते हैं इसी वास्ते कि ख़्वाब

अहमद शहरयार

ख़्वाब-ए-ज़ियाँ हैं उम्र का ख़्वाब हैं हासिल-ए-हयात

अहमद शहरयार

राज़-ए-दरून-ए-आस्तीं कश्मकश-ए-बयाँ में था

अहमद शहरयार

गुमान के लिए नहीं यक़ीन के लिए नहीं

अहमद शहरयार

ले के फिर ज़ख़्मों की सौग़ात बहारो आओ

अहमद शाहिद ख़ाँ

कुचल कुचल के न फ़ुटपाथ को चलो इतना

अहमद सलमान

जो हम पे गुज़रे थे रंज सारे जो ख़ुद पे गुज़रे तो लोग समझे

अहमद सलमान

फूल ख़ुशबू उन पे उड़ती तितलियों की ख़ैर हो

अहमद सज्जाद बाबर

हैं शाख़ शाख़ परेशाँ तमाम घर मेरे

अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी

इक ख़्वाब है ये प्यास भी दरिया भी ख़्वाब है

अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी

आसमाँ-ज़ाद ज़मीनों पे कहीं नाचते हैं

अहमद सग़ीर सिद्दीक़ी

मैं ख़ाक हो रहा हूँ यहाँ ख़ाक-दान में

अहमद रिज़वान

किसी को छोड़ देता हूँ किसी के साथ चलता हूँ

अहमद रिज़वान

आता ही नहीं होने का यक़ीं क्या बात करूँ

अहमद रिज़वान

आँखें बनाता दश्त की वुसअत को देखता

अहमद रिज़वान

हम ही बदलेंगे रह-ओ-रस्म-ए-गुलिस्ताँ यारो

अहमद रियाज़

अब इस के तसव्वुर से भी झुकने लगीं आँखें

अहमद राही

वक़्त की बात

अहमद राही

ये दास्तान-ए-ग़म-ए-दिल कहाँ कही जाए

अहमद राही

वो बे-नियाज़ मुझे उलझनों में डाल गया

अहमद राही

तवील रातों की ख़ामुशी में मिरी फ़ुग़ाँ थक के सो गई है

अहमद राही

तवील रातों की ख़ामुशी में मिरी फ़ुग़ाँ थक के सो गई है

अहमद राही