ख्वाब Poetry (page 96)
नींद को लोग मौत कहते हैं
अहसन यूसुफ़ ज़ई
घर घर आपस में दुश्मनी भी है
अहसन यूसुफ़ ज़ई
रिवायत
अहसन सलीम
हमारा इंतिख़ाब अच्छा नहीं ऐ दिल तो फिर तू ही
अहसन मारहरवी
सो हश्र में लिए दिल-ए-हसरत मआब में
अहसन मारहरवी
मुतमइन अपने यक़ीं पर अगर इंसाँ हो जाए
अहसन मारहरवी
ऐ दिल न सुन अफ़्साना किसी शोख़ हसीं का
अहसन मारहरवी
अदा में बाँकपन अंदाज़ में इक आन पैदा कर
अहसन मारहरवी
अदा में बाँकपन अंदाज़ में इक आन पैदा कर
अहसन मारहरवी
जो जो शुऊर-ए-ज़ेहन पे आता चला गया
अहसन लखनवी
इलाज-ए-हसरत-ए-दिल-गीर कर रहा हूँ मैं
अहसन लखनवी
ख़याल वो भी मिरे ज़ेहन के मकान में था
अहसन इमाम अहसन
एक रंगीन ख़्वाब है दुनिया
अहसन इमाम अहसन
मक़ाम-ए-हिज्र कहीं इम्तिहाँ से ख़ाली है
अहमद निसार
इल्म की ज़रूरत
अहमक़ फफूँदवी
वो ख़्वाब सा पैकर है गुल-ए-तर की तरह है
अहमद ज़िया
प्यार किया था तुम से मैं ने अब एहसान जताना क्या
अहमद ज़िया
म्यूजियम
अहमद ज़फ़र
हैरत-ख़ाना-ए-इमरोज़
अहमद ज़फ़र
डेड-हाऊस
अहमद ज़फ़र
ज़हर को मय न कहूँ मय को गवारा न कहूँ
अहमद ज़फ़र
ये तेरा ख़याल है कि तू है
अहमद ज़फ़र
तरस रहा हूँ क़रार-ए-दिल-ओ-नज़र के लिए
अहमद ज़फ़र
फ़लक पे चाँद नहीं कोई अब्र-पारा नहीं
अहमद ज़फ़र
इक तसव्वुर तो है तस्वीर नहीं
अहमद ज़फ़र
और क्या मेरे लिए अरसा-ए-महशर होगा
अहमद ज़फ़र
ख़ुद को छूने से डरा करते हैं
अहमद वसी
गहराइयों से मुझ को किसी ने निकाल के
अहमद वसी
अपनी ही आवाज़ के क़द के बराबर हो गया
अहमद तनवीर
पस-ए-ख़याल हूँ कितना ज़ुहूर कितना हूँ
अहमद शनास