ख्वाब Poetry (page 94)
इक लम्हे ने जीवन-धारा रोक लिया
अकबर हमीदी
हर नफ़स मिन्नत-कश-ए-आलाम है
अकबर हैदरी
मिस सीमीं बदन
अकबर इलाहाबादी
दरबार1911
अकबर इलाहाबादी
उन्हें निगाह है अपने जमाल ही की तरफ़
अकबर इलाहाबादी
उम्मीद टूटी हुई है मेरी जो दिल मिरा था वो मर चुका है
अकबर इलाहाबादी
तिरी ज़ुल्फ़ों में दिल उलझा हुआ है
अकबर इलाहाबादी
रंग-ए-शराब से मिरी निय्यत बदल गई
अकबर इलाहाबादी
न रूह-ए-मज़हब न क़ल्ब-ए-आरिफ़ न शाइराना ज़बान बाक़ी
अकबर इलाहाबादी
हवा-ए-शब भी है अम्बर-अफ़्शाँ उरूज भी है मह-ए-मुबीं का
अकबर इलाहाबादी
हल्क़े नहीं हैं ज़ुल्फ़ के हल्क़े हैं जाल के
अकबर इलाहाबादी
दिल हो ख़राब दीन पे जो कुछ असर पड़े
अकबर इलाहाबादी
दश्त-ए-ग़ुर्बत है अलालत भी है तन्हाई भी
अकबर इलाहाबादी
तेरा ख़याल जाँ के बराबर लगा मुझे
अकबर अली खान अर्शी जादह
सन्नाटा तूफ़ाँ से सिवा हो ये भी तो हो सकता है
अकबर अली खान अर्शी जादह
हुस्न ही के दम से हैं ये कहानियाँ सारी
अकबर अली खान अर्शी जादह
मिरी मिसाल तो ऐसी है जैसे ख़्वाब कोई
अजमल सिराज
हम अपने-आप में रहते हैं दम में दम जैसे
अजमल सिराज
गुज़र गई है अभी साअत-ए-गुज़िश्ता भी
अजमल सिराज
बुझ गया रात वो सितारा भी
अजमल सिराज
ज़िंदगी रोज़ बनाती है बहाने क्या क्या
अजमल सिद्दीक़ी
रास्ते के पेच-ओ-ख़म क्या शय हैं सोचा ही नहीं
अजमल अजमली
हर घड़ी रहता है अब ख़दशा मुझे
अजमल अजमली
फ़िरऔन-ए-वक़्त कोई भी हो सर-कशी करो
अजमल अजमली
मैं जिन को अपना कहता हूँ कब वो मिरे काम आते हैं
आजिज़ मातवी
मय-ख़ाने पर काले बादल जब घिर घिर कर आते हैं
आजिज़ मातवी
घोंसले राख हो गए जल के
अजीत सिंह हसरत
इक याद सो रहे को उठाती है आज भी
अजीत सिंह हसरत
उन को अपने क़रीब देखा है
अजीत कुमार दिल
अश्कों से कब मिटे हैं दामन के दाग़ यारो
अजय सहाब