ख्वाब Poetry (page 51)
अजब रंग-ए-तिलस्म-ओ-तर्ज़-ए-नौ है
दानियाल तरीर
दुआ हमारी कभी बा-असर नहीं होती
दानिश फ़राही
बहुत रोया हूँ मैं जब से ये मैं ने ख़्वाब देखा है
दाग़ देहलवी
ये बात बात में क्या नाज़ुकी निकलती है
दाग़ देहलवी
उज़्र उन की ज़बान से निकला
दाग़ देहलवी
तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किस का था
दाग़ देहलवी
शब-ए-वस्ल ज़िद में बसर हो गई
दाग़ देहलवी
पयामी कामयाब आए न आए
दाग़ देहलवी
मुझ सा न दे ज़माने को परवरदिगार दिल
दाग़ देहलवी
खुलता नहीं है राज़ हमारे बयान से
दाग़ देहलवी
काबे की है हवस कभी कू-ए-बुताँ की है
दाग़ देहलवी
इन आँखों ने क्या क्या तमाशा न देखा
दाग़ देहलवी
होश आते ही हसीनों को क़यामत आई
दाग़ देहलवी
ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया
दाग़ देहलवी
भवें तनती हैं ख़ंजर हाथ में है तन के बैठे हैं
दाग़ देहलवी
चेहरे पे नूर-ए-सुब्ह सियह गेसुओं में रात
दाएम ग़व्वासी
नज़रों के गिर्द यूँ तो कोई दायरा न था
डी. राज कँवल
लोग जिन को आज तक बार-ए-गराँ समझा किए
डी. राज कँवल
लोग सारे भले नहीं होते
चित्रांश खरे
जो मेरी छत का रस्ता चाँद ने देखा नहीं होता
चित्रांश खरे
ये मायूसी कहीं वज्ह-ए-सुकून-ए-दिल न बन जाए
चराग़ हसन हसरत
इस तरह कर गया दिल को मिरे वीराँ कोई
चराग़ हसन हसरत
तरकीब-ए-सर्फ़ी
चाैधरी मोहम्मद नईम
जो आँसुओं को न चमकाए वो ख़ुशी क्या है
चरख़ चिन्योटी
जब सर-ए-बाम वो ख़ुर्शीद-जमाल आता है
चरख़ चिन्योटी
बे-ख़ुदी में है न वो पी कर सँभल जाने में है
चरख़ चिन्योटी
सर उठा के मत चलिए आज के ज़माने में
चरण सिंह बशर
फ़ज़ा-ए-आदमियत को सँवरने ही नहीं देते
चरण सिंह बशर
लौट चलिए
चन्द्रभान ख़याल
वो क्या जवाब दे अर्ज़-ए-सवाल से पहले
चंद्र प्रकाश जौहर बिजनौरी