ख्वाब Poetry (page 50)

दर्द औरों का दिल में गर रखिए

दरवेश भारती

वो सलीक़ा हमें जीने का सिखा दे साक़ी

दर्शन सिंह

तुझे क्या ख़बर मिरे हम-सफ़र मिरा मरहला कोई और है

दर्शन सिंह

राज़-ए-निहाँ थी ज़िंदगी राज़-ए-निहाँ है आज भी

दर्शन सिंह

हँसी गुलों में सितारों में रौशनी न मिली

दर्शन सिंह

गुलों पे ख़ाक-ए-मेहन के सिवा कुछ और नहीं

दर्शन सिंह

वाए नादानी कि वक़्त-ए-मर्ग ये साबित हुआ

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

सैर-ए-बहार-ए-बाग़ से हम को मुआ'फ़ कीजिए

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मत जा तर-ओ-ताज़गी पे उस की

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

खुल नहीं सकती हैं अब आँखें मेरी

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

खुल नहीं सकती हैं अब आँखें मिरी

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

है ग़लत गर गुमान में कुछ है

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मदरसा या दैर था या काबा या बुत-ख़ाना था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मदरसा या दैर था या काबा या बुत-ख़ाना था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

दिल मिरा फिर दुखा दिया किन ने

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

शेल्फ़ पे उल्टा कर के रख दो और बिसरा दो

दानियाल तरीर

ख़्वाब का क्या है रात के नक़्श-ओ-निगार बनाओ

दानियाल तरीर

ख़्वाब का क्या है रात के नक़्श-ओ-निगार बनाओ

दानियाल तरीर

ख़्वाब जज़ीरा बन सकते थे नहीं बने

दानियाल तरीर

मैं नफ़ी में

दानियाल तरीर

ये मो'जिज़ा भी दिखाती है सब्ज़ आग मुझे

दानियाल तरीर

साकित हो मगर सब को रवानी नज़र आए

दानियाल तरीर

रंग और नूर की तमसील से होगा कि नहीं

दानियाल तरीर

मिट्टी था और दूध में गूँधा गया मुझे

दानियाल तरीर

ख़्वाब-कारी वही कमख़्वाब वही है कि नहीं

दानियाल तरीर

ख़्वाब जज़ीरा बन सकते थे नहीं बने

दानियाल तरीर

गया कि सैल-ए-रवाँ का बहाव ऐसा था

दानियाल तरीर

एक बुझाओ एक जलाओ ख़्वाब का क्या है

दानियाल तरीर

चाँद छूने की तलबगार नहीं हो सकती

दानियाल तरीर

ब-तर्ज़-ए-ख़्वाब सजानी पड़ी है आख़िर-कार

दानियाल तरीर