ख्वाब Poetry (page 49)

हवा ने इस्म कुछ ऐसा पढ़ा था

दिलावर अली आज़र

दरून-ए-ख़्वाब नया इक जहाँ निकलता है

दिलावर अली आज़र

बना रहा था कोई आब ओ ख़ाक से कुछ और

दिलावर अली आज़र

अजीब रंग अजब हाल में पड़े हुए हैं

दिलावर अली आज़र

'आज़र' रहा है तेशा मिरे ख़ानदान में

दिलावर अली आज़र

आँख में ख़्वाब ज़माने से अलग रक्खा है

दिलावर अली आज़र

क्या जाने किस ख़याल से छोड़ा प हाल-ए-ज़ार

दिल शाहजहाँपुरी

तमकीं है और हुस्न-ए-गरेबाँ है और हम

दिल शाहजहाँपुरी

क्या कहिए दास्तान-ए-तमन्ना बदल गई

दिल शाहजहाँपुरी

फिर मरहला-ए-ख़्वाब-ए-बहाराँ से गुज़र जा

दिल अय्यूबी

लम्हा लम्हा मुझे वीरान किए देता है

दिल अय्यूबी

रह गया ख़्वाब-ए-दिल-आराम अधूरा किस का

दिल अय्यूबी

फिर मरहला-ए-ख़्वाब-ए-बहाराँ से गुज़र जा

दिल अय्यूबी

फिर वही शख़्स मिरे ख़्वाब में आया होगा

धीरेंद्र सिंह फ़य्याज़

देखते देखते ही साल गुज़र जाता है

धीरेंद्र सिंह फ़य्याज़

आसमाँ खोल दिया पैरों में राहें रख दीं

धीरेंद्र सिंह फ़य्याज़

उदासी के मंज़र मकानों में हैं

देवमणि पांडेय

इस जहाँ में प्यार महके ज़िंदगी बाक़ी रहे

देवमणि पांडेय

उर्वशी आसमाँ से आ जाए

दीद राही

रूह-ए-आवारा

दाऊद ग़ाज़ी

उस शकर-लब का मैं ख़याली हूँ

दाऊद औरंगाबादी

तेरी अँखियाँ के तसव्वुर में सदा मस्ताना हूँ

दाऊद औरंगाबादी

सीना साफ़ी सूँ मिस्ल-ए-दर्पन कर

दाऊद औरंगाबादी

ख़िर्क़ा-पोशी में ख़ुद-नुमाई है

दाऊद औरंगाबादी

दिल में ख़याल-ए-यार है जासूस की नमत

दाऊद औरंगाबादी

आज बदली है हवा साक़ी पिला जाम-ए-शराब

दाऊद औरंगाबादी

इक ख़्वाब का ख़याल है दुनिया कहें जिसे

दत्तात्रिया कैफ़ी

इक ख़्वाब का ख़याल है दुनिया कहें जिसे

दत्तात्रिया कैफ़ी

ढूँढने से यूँ तो इस दुनिया में क्या मिलता नहीं

दत्तात्रिया कैफ़ी

जब से किसी से दर्द का रिश्ता नहीं रहा

दरवेश भारती