ख्वाब Poetry (page 47)

चल रहा हूँ पेश-ओ-पस-मंज़र से उकताया हुआ

एजाज़ गुल

अक्स उभरा न था आईना-ए-दिल-दारी का

एजाज़ गुल

ख़्वाब ओ ताबीर-ए-बे-निशाँ मैं था

एजाज़ आज़मी

सदा-ए-अहद-ए-वफ़ा को ज़वाल क्यूँ आया

एजाज़ अासिफ़

किए हैं मुझ पे जो एहसाँ जता नहीं सकता

एजाज़ अासिफ़

बे-नियाज़-ए-सौत-ओ-महरूम-ए-बयाँ रक्खा गया

एजाज़ अासिफ़

आ गया ईसार मेरे हल्क़ा-ए-अहबाब में

एजाज़ अासिफ़

बहती हुई आँखों की रवानी में मरे हैं

एजाज तवक्कल

बहती हुई आँखों की रवानी में मरे हैं

एजाज तवक्कल

पहचान

एजाज़ अहमद एजाज़

मुहाजिर

एजाज़ अहमद एजाज़

यूँ गुज़रता है तिरी याद की वादी में ख़याल

एहतिशाम हुसैन

कुछ मिरे शौक़ ने दर-पर्दा कहा हो जैसे

एहतिशाम हुसैन

गुलशन-ए-दिल में मिले अक़्ल के सहरा में मिले

एहतिशाम हुसैन

ख़्वाब आँखों में निहाँ है अब भी

एहतिशाम अख्तर

सुर्ख़ मौसम की कहानी है पुरानी हो न हो

एहतराम इस्लाम

हादसों का सिलसिला मंज़र-ब-मंज़र जम गया

एहतराम इस्लाम

हादसों का सिलसिला मंज़र-ब-मंज़र जम गया

एहतराम इस्लाम

ग़ैज़ का सूरज था सर पर सच को सच कहता तो कौन

एहतराम इस्लाम

ग़ैज़ का सूरज था सर पर सच को सच कहता तो कौन

एहतराम इस्लाम

ज़ख़्मों को मेरे दिल के सजाओ तो बने बात

एहसान जाफ़री

ख़याल के फूल खिल रहे हैं बहार के गीत गा रहा हूँ

एहसान दरबंगावी

वफ़ाएँ कर के जफ़ाओं का ग़म उठाए जा

एहसान दानिश

रानाई-ए-कौनैन से बे-ज़ार हमीं थे

एहसान दानिश

मिरे मिटाने की तदबीर थी हिजाब न था

एहसान दानिश

जो ले के उन की तमन्ना के ख़्वाब निकलेगा

एहसान दानिश

इश्क़ को तक़लीद से आज़ाद कर

एहसान दानिश

इश्क़ की दुनिया में इक हंगामा बरपा कर दिया

एहसान दानिश

दिल की रग़बत है जब आप ही की तरफ़

एहसान दानिश

अपनी रुस्वाई का एहसास तो अब कुछ भी नहीं

एहसान दानिश