ख्वाब Poetry (page 45)

किसी गुमाँ पे तवक़्क़ो' ज़ियादा रखते हैं

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दरबार में अब सतवत-ए-शाही की अलामत

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मिटा के तीरगी तनवीर चाहता है दिल

फ़ैय्याज़ रश्क़

ख़याल-ओ-ख़्वाब को परवाज़ देता रहता हूँ

फ़ैय्याज़ रश्क़

हिमाला की दासियाँ

फ़ैसल सईद फ़ैसल

ये तीरा-बख़्त बयानों में क़ैद रहते हैं

फ़ैसल सईद फ़ैसल

क्यूँ आसमान-ए-हिज्र के तारे चले गए

फ़ैसल फेहमी

तू ख़्वाब-ए-दिगर है तिरी तदफ़ीन कहाँ हो

फ़ैसल अजमी

जिस्म थकता नहीं चलने से कि वहशत का सफ़र

फ़ैसल अजमी

आवाज़ दे रहा था कोई मुझ को ख़्वाब में

फ़ैसल अजमी

मुझ को ये फ़िक्र कब है कि साया कहाँ गया

फ़ैसल अजमी

हर्फ़ अपने ही मआनी की तरह होता है

फ़ैसल अजमी

हर शख़्स परेशान है घबराया हुआ है

फ़ैसल अजमी

इंक़िलाबी औरत

फ़हमीदा रियाज़

एक ज़न-ए-ख़ाना-ब-दोश

फ़हमीदा रियाज़

ज़रा मोहतात होना चाहिए था

फ़हमी बदायूनी

वो कहीं था कहीं दिखाई दिया

फ़हमी बदायूनी

चलती साँसों को जाम करने लगा

फ़हमी बदायूनी

ज़िंदगी से मुकालिमा

फ़हीम शनास काज़मी

ज़मीं ख़्वाब ख़ुश्बू

फ़हीम शनास काज़मी

वो और मैं....

फ़हीम शनास काज़मी

शब-गर्दों के लिए इक नज़्म

फ़हीम शनास काज़मी

राहदारी में गूँजती नज़्म

फ़हीम शनास काज़मी

क़िस्सा तमाम

फ़हीम शनास काज़मी

''ला'' भी है एक गुमाँ

फ़हीम शनास काज़मी

हादसा

फ़हीम शनास काज़मी

भगत-सिंह के नाम

फ़हीम शनास काज़मी

बेबसी गीत बुनती रहती है

फ़हीम शनास काज़मी

ऐ मुबारज़-तलब

फ़हीम शनास काज़मी

आईना देखते हो

फ़हीम शनास काज़मी