ख्वाब Poetry (page 46)

रस्ते में शाम हो गई क़िस्सा तमाम हो चुका

फ़हीम शनास काज़मी

मैं यूँ जहाँ के ख़्वाब से तन्हा गुज़र गया

फ़हीम शनास काज़मी

लहू की लहर में इक ख़्वाब-ए-दिल-शिकन भी गया

फ़हीम शनास काज़मी

हम एक दिन निकल आए थे ख़्वाब से बाहर

फ़हीम शनास काज़मी

दिल-ए-तबाह को अब तक नहीं यक़ीं आया

फ़हीम शनास काज़मी

दोस्ती में न दुश्मनी में हम

फ़हीम जोगापुरी

हर आश्ना से उस बिन बेगाना हो रहा हूँ

फ़ाएज़ देहलवी

बिछड़ने वाले ने वक़्त-ए-रुख़्सत कुछ इस नज़र से पलट के देखा

एज़ाज़ अहमद आज़र

तुम ऐसा करना कि कोई जुगनू कोई सितारा सँभाल रखना

एज़ाज़ अहमद आज़र

उजाला कैसा उजाले का ख़्वाब ला न सके

एज़ाज़ अफ़ज़ल

सरहद-ए-जल्वा से जो आगे निकल जाएगी

एज़ाज़ अफ़ज़ल

लहू ने क्या तिरे ख़ंजर को दिलकशी दी है

एज़ाज़ अफ़ज़ल

हर एक गाम पे आसूदगी खड़ी होगी

एज़ाज़ अफ़ज़ल

जिस्म ही पामाल हो जाए तो सर क्या कीजिए

एज़ाज़ अफ़ज़ल

अब सराब के चश्मे मौजज़न नहीं होते

एज़ाज़ अफ़ज़ल

बदलते पहलू

एलिज़ाबेथ कुरियन मोना

डूबने वाले को तिनके का सहारा है बहुत

एलिज़ाबेथ कुरियन मोना

आप आए हैं हाल पूछा है

एजाज़ वारसी

दिल बुझ गया तो गर्मी-ए-बाज़ार भी नहीं

एजाज़ वारसी

मिल सकेगी अब भी दाद-ए-आबला-पाई तो क्या

एजाज़ सिद्दीक़ी

नक़्श-बर-आब हो गया हूँ मैं

एजाज़ रहमानी

ख़ुश्क दरिया पड़ा है ख़्वाहिश का

एजाज़ रहमानी

था वो जंगल कि नगर याद नहीं

एजाज़ उबैद

जो जा चुके हैं ग़ालिबन उतरें कभी ज़ीना तिरा

एजाज़ उबैद

धुँद का आँखों पर होगा पर्दा इक दिन

एजाज़ उबैद

अभी तमाम आइनों में ज़र्रा ज़र्रा आब है

एजाज़ उबैद

उसी जन्नत जहन्नम में मरूँगा

एजाज़ गुल

रह रहे हैं मकीं शबों के

एजाज़ गुल

किसे ख़याल था ऐसी भी साअ'तें होंगी

एजाज़ गुल

दुश्वार है अब रास्ता आसान से आगे

एजाज़ गुल