Heart Broken Poetry (page 124)

मैं तो लम्हात की साज़िश का निशाना ठहरा

फ़ारूक़ शमीम

जो ख़ुद पे बैठे बिठाए ज़वाल ले आए

फ़ारूक़ शमीम

दर्द के चेहरे बदल जाते हैं क्यूँ

फ़ारूक़ शमीम

अपनी लग़्ज़िश को तो इल्ज़ाम न देगा कोई

फ़ारूक़ शफ़क़

याद रखते किस तरह क़िस्से कहानी लोग थे

फ़ारूक़ शफ़क़

वो अलग चुप है ख़ुद से शर्मा कर

फ़ारूक़ शफ़क़

रात काफ़ी लम्बी थी दूर तक था तन्हा मैं

फ़ारूक़ शफ़क़

फूलों को वैसे भी मुरझाना है मुरझाएँगे

फ़ारूक़ शफ़क़

पौ फटी एक ताज़ा कहानी मिली

फ़ारूक़ शफ़क़

कोई भी शख़्स न हंगामा-ए-मकाँ में मिला

फ़ारूक़ शफ़क़

खिड़कियों पर मल्गजे साए से लहराने लगे

फ़ारूक़ शफ़क़

होने वाला था इक हादसा रह गया

फ़ारूक़ शफ़क़

दुनिया क्या है बर्फ़ की इक अलमारी है

फ़ारूक़ शफ़क़

छाँव की शक्ल धूप की रंगत बदल गई

फ़ारूक़ शफ़क़

बहुत धोका किया ख़ुद को मगर क्या कर लिया मैं ने

फ़ारूक़ शफ़क़

आँधियों का ख़्वाब अधूरा रह गया

फ़ारूक़ शफ़क़

सुना है लोग वहाँ मुझ से ख़ार खाते हैं

फ़ारूक़ नाज़की

जुनूँ-आसार मौसम का पता कोई नहीं देगा

फ़ारूक़ नाज़की

हिसार-ए-ख़ौफ़-ओ-हिरास में है बुतान-ए-वहम-ओ-गुमाँ की बस्ती

फ़ारूक़ नाज़की

तेज़ाब, आकार ख़ुश्बू का

फ़ारूक़ नाज़की

नींद क्यूँ नहीं आती

फ़ारूक़ नाज़की

मौत

फ़ारूक़ नाज़की

मातम-ए-नीम-ए-शब

फ़ारूक़ नाज़की

एक परी आकाश से उतरी

फ़ारूक़ नाज़की

एहसास

फ़ारूक़ नाज़की

बचपन

फ़ारूक़ नाज़की

और मैं चुप रहा

फ़ारूक़ नाज़की

यूँही कर लेते हैं औक़ात बसर अपना क्या

फ़ारूक़ नाज़की

तेरी मर्ज़ी न दे सबात मुझे

फ़ारूक़ नाज़की

पूरे क़द से मैं खड़ा हूँ सामने आएगा क्या

फ़ारूक़ नाज़की