Heart Broken Poetry (page 122)
मुद्दत से वो ख़ुशबू-ए-हिना ही नहीं आई
फ़सीह अकमल
लटकाई दीवार पे किस ने हातिम की तस्वीर
फ़सीह अकमल
कुछ नया करने की ख़्वाहिश में पुराने हो गए
फ़सीह अकमल
किसी के सामने इस तरह सुर्ख़-रू होगी
फ़सीह अकमल
जो तू नहीं है तो लगता है अब कि तू क्या है
फ़सीह अकमल
जड़ों से सूखता तन्हा शजर है
फ़सीह अकमल
देखिए हालात के जोगी का कब टूटे शराप
फ़सीह अकमल
दे गया लिख कर वो बस इतना जुदा होते हुए
फ़सीह अकमल
चश्म-ए-हैरत को तअल्लुक़ की फ़ज़ा तक ले गया
फ़सीह अकमल
जो दूर रह के उड़ाता रहा मज़ाक़ मिरा
फ़रियाद आज़र
इस तमाशे का सबब वर्ना कहाँ बाक़ी है
फ़रियाद आज़र
सुराग़ भी न मिले अजनबी सदा के मुझे
फ़रियाद आज़र
सुब्ह होती है तो दफ़्तर में बदल जाता है
फ़रियाद आज़र
पड़ा था लिखना मुझे ख़ुद ही मर्सिया मेरा
फ़रियाद आज़र
इसी फ़ुतूर में कर्ब-ओ-बला से लिपटे हुए
फ़रियाद आज़र
इस तमाशे का सबब वर्ना कहाँ बाक़ी है
फ़रियाद आज़र
अदा हुआ न क़र्ज़ और वजूद ख़त्म हो गया
फ़रियाद आज़र
ये दिल-कथा है अदाकार तेरे बस में नहीं
फ़रताश सय्यद
वो अपनी ज़ात में गुम था नहीं खुला मिरे साथ
फ़रताश सय्यद
वो अपनी ज़ात में गुम था नहीं खुला मेरे साथ
फ़रताश सय्यद
सफ़-ए-मातम पे जो हम नाचने गाने लग जाएँ
फ़रताश सय्यद
नख़्ल-ए-ममनूअा के रुख़ दोबारा गया मैं तो मारा गया
फ़रताश सय्यद
मैं अपने दिल की तरह आइना बना हुआ हूँ
फ़रताश सय्यद
इश्क़ हूँ जुरअत-ए-इज़हार भी कर सकता हूँ
फ़रताश सय्यद
हम हैं बस इज़्न-ए-सफ़र होने तक
फ़रताश सय्यद
गली का पत्थर था मुझ में आया बिगाड़ ऐसा
फ़रताश सय्यद
दर-ए-फ़क़ीर पे जो आए वो दुआ ले जाए
फ़रताश सय्यद
मिरे जज़्बे मिरी शहादत हैं
फ़र्रुख़ ज़ोहरा गिलानी
अभी तलक है सदा पानियों पे ठहरी हुई
फ़र्रुख़ ज़ोहरा गिलानी
तन्हा छोड़ के जाने वाले इक दिन पछताओगे
फ़र्रुख़ ज़ोहरा गिलानी