Heart Broken Poetry (page 121)

कितने अच्छे लोग थे क्या रौनक़ें थीं उन के साथ

फ़ातिमा हसन

भूल गई हूँ किस से मेरा नाता था

फ़ातिमा हसन

और कोई नहीं है उस के सिवा

फ़ातिमा हसन

ज़ख़्मी उँगलियों से एक नज़्म

फ़ातिमा हसन

नज़्म

फ़ातिमा हसन

मेरी बेटी चलना सीख गई

फ़ातिमा हसन

एक नज़्म माँ के लिए

फ़ातिमा हसन

आख़िरी लफ़्ज़

फ़ातिमा हसन

ज़मीं से रिश्ता-ए-दीवार-ओ-दर भी रखना है

फ़ातिमा हसन

सुकून-ए-दिल के लिए इश्क़ तो बहाना था

फ़ातिमा हसन

रुका जवाब की ख़ातिर न कुछ सवाल किया

फ़ातिमा हसन

रूह की माँग है वो जिस्म का सामान नहीं

फ़ातिमा हसन

मिरी ज़मीं पे लगी आप के नगर में लगी

फ़ातिमा हसन

मैं टूट कर उसे चाहूँ ये इख़्तियार भी हो

फ़ातिमा हसन

मैं टूट कर उसे चाहूँ ये इख़्तियार भी हो

फ़ातिमा हसन

किस से बिछड़ी कौन मिला था भूल गई

फ़ातिमा हसन

ख़्वाब गिरवी रख दिए आँखों का सौदा कर दिया

फ़ातिमा हसन

ख़ुशबू है और धीमा सा दुख फैला है

फ़ातिमा हसन

कौन ख़्वाहिश करे कि और जिए

फ़ातिमा हसन

जिन ख़्वाहिशों को देखती रहती थी ख़्वाब में

फ़ातिमा हसन

जिन ख़्वाहिशों को देखती रहती थी ख़्वाब में

फ़ातिमा हसन

जाता है जो घरों को वो रस्ता बदल दिया

फ़ातिमा हसन

बिखर रहे थे हर इक सम्त काएनात के रंग

फ़ातिमा हसन

हर एक आँख में आँसू हर एक लब पे फ़ुग़ाँ

फ़सीह अकमल

हमीं पे ख़त्म हैं जौर-ओ-सितम ज़माने के

फ़सीह अकमल

ये वो सफ़र है जहाँ ख़ूँ-बहा ज़रूरी है

फ़सीह अकमल

उस की दीवार पे मनक़ूश है वो हर्फ़-ए-वफ़ा

फ़सीह अकमल

प्यार जादू है किसी दिल में उतर जाएगा

फ़सीह अकमल

मुज़्तरिब दिल की कहानी और है

फ़सीह अकमल

मुनव्वर जिस्म-ओ-जाँ होने लगे हैं

फ़सीह अकमल