Heart Broken Poetry (page 119)
लहू ही कितना है जो चश्म-ए-तर से निकलेगा
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
लहू हमारी जबीं का किसी के चेहरे पर
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
खुला न मुझ से तबीअत का था बहुत गहरा
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
जुरअत-ए-इज़हार से रोकेगी क्या
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
जबीं पे गर्द है चेहरा ख़राश में डूबा
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
हर इक क़यास हक़ीक़त से दूर-तर निकला
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
ग़ज़ल के पर्दे में बे-पर्दा ख़्वाहिशें लिखना
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
फ़ुज़ूल शय हूँ मिरा एहतिराम मत करना
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
छाँव को तकते धूप में चलते एक ज़माना बीत गया
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
चेहरा सालिम न नज़र ही क़ाएम
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
चंद साँसें हैं मिरा रख़्त-ए-सफ़र ही कितना
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
बिसात-ए-दानिश-ओ-हर्फ़-ओ-हुनर कहाँ खोलें
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
बहुत जुमूद था बे-हौसलों में क्या करता
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
और क्या मुझ से कोई साहिब-नज़र ले जाएगा
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
अच्छा हुआ मैं वक़्त के मेहवर से कट गया
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
आँखों के ख़्वाब दिल की जवानी भी ले गया
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
आह को बाद-ए-सबा दर्द को ख़ुशबू लिखना
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
अपने लोगों के नाम
फ़य्याजुद्दीन साइब
तुझे ख़बर है कि इब्तिदा भी है इंतिहा भी
फ़य्याज़ तहसीन
तमाशा फिर सर-ए-बाज़ार करना
फ़य्याज़ तहसीन
कभी याद-ए-ख़ुदा कभी इश्क़-ए-बुताँ यूँही सारी उम्र गँवा बैठा
फ़य्याज़ तहसीन
अब आ गए हो तो रफ़्तगाँ को भी याद रखना
फ़य्याज़ तहसीन
आज जाने की ज़िद न करो
फ़य्याज़ हाशमी
तुझ से दिल में जो गिला था वो न लाए लब पर
फ़य्याज़ फ़ारुक़ी
जब उन की बज़्म में हर ख़ास ओ आम रुस्वा है
फ़य्याज़ फ़ारुक़ी
शिकवा हम तुझ से भला तेज़ हवा क्या करते
फ़य्याज़ फ़ारुक़ी
राह में उस की चलें और इम्तिहाँ कोई न हो
फ़य्याज़ फ़ारुक़ी
निकला जो चिलमनों से वो चेहरा आफ़्ताबी
फ़य्याज़ फ़ारुक़ी
मैं कहाँ आया हूँ लाए हैं तिरी महफ़िल में
फ़े सीन एजाज़
किस अनमोल पशेमानी की दौलत है इन आँखों में
फ़े सीन एजाज़