Heart Broken Poetry (page 126)
किसी की राह में 'फ़ारूक़' बर्बाद-ए-वफ़ा हो कर
फ़ारूक़ बाँसपारी
ग़म-ए-इश्क़ ही ने काटी ग़म-ए-इश्क़ की मुसीबत
फ़ारूक़ बाँसपारी
तुम्हारे क़स्र-आज़ादी के मेमारों ने क्या पाया
फ़ारूक़ बाँसपारी
कोहसार का ख़ूगर है न पाबंद-ए-गुलिस्ताँ
फ़ारूक़ बाँसपारी
कभी बे-नियाज़-ए-मख़्ज़न कभी दुश्मन-ए-किनारा
फ़ारूक़ बाँसपारी
जो रहा यूँ ही सलामत मिरा जज़्ब-ए-वालहाना
फ़ारूक़ बाँसपारी
दिल-ए-ईज़ा-तलब ले तेरा कहना कर लिया मैं ने
फ़ारूक़ बाँसपारी
ब-रोज़-ए-हश्र मिरे साथ दिल-लगी ही तो है
फ़ारूक़ बाँसपारी
वो बस्ती याद आती है
फ़ारूक़ बख़्शी
शिकायत
फ़ारूक़ बख़्शी
शहर-ए-दोस्त
फ़ारूक़ बख़्शी
जब हम पहली बार मिले थे
फ़ारूक़ बख़्शी
वो न आएगा यहाँ वो नहीं आने वाला
फ़ारूक़ बख़्शी
वो ख़ुद अपना दामन बढ़ाने लगे
फ़ारूक़ बख़्शी
उस के होंटों पे बद-दुआ' भी नहीं
फ़ारूक़ बख़्शी
तमाम शहर में उस जैसा ख़स्ता-हाल न था
फ़ारूक़ बख़्शी
जली हैं दर्द की शमएँ मगर अंधेरा है
फ़ारूक़ बख़्शी
जैसी ख़्वाहिश होती हे कब होता हे
फ़ारूक़ बख़्शी
इक पल कहीं रुके थे सफ़र याद आ गया
फ़ारूक़ बख़्शी
बिछड़ना मुझ से तो ख़्वाबों में सिलसिला रखना
फ़ारूक़ बख़्शी
तारे शुमार करते हैं रो रो के रात भर
फ़ारूक़ अंजुम
शहर की फ़सीलों पर ज़ख़्म जगमगाएँगे
फ़ारूक़ अंजुम
सब्ज़ मौसम की रिफ़ाक़त उस का कारोबार है
फ़ारूक़ अंजुम
न-जाने कितने लहजे और कितने रंग बदलेगा
फ़ारूक़ अंजुम
मैं मो'तबर हूँ इश्क़ मिरा मो'तबर नहीं
फ़ारूक़ अंजुम
ख़ाली नहीं है कोई यहाँ पर अज़ाब से
फ़ारूक़ अंजुम
जो बैठो सोचने हर ज़ख़्म-ए-दिल कसकता है
फ़ारूक़ अंजुम
जंग में जाएगा अब मेरा ही सर जान गया
फ़ारूक़ अंजुम
जब भी मिला वो टूट के हम से मिला तो है
फ़ारूक़ अंजुम
अब धूप मुक़द्दर हुई छप्पर न मिलेगा
फ़ारूक़ अंजुम