Heart Broken Poetry (page 127)

मचलती है मिरे सीने में तेरी आरज़ू क्या क्या

फ़रोग़ हैदराबादी

इस क़दर महव-ए-तसव्वुर हूँ सितमगर तेरा

फ़रोग़ हैदराबादी

दिल नहीं मिलने का फिर मेरा सितमगर टूट कर

फ़रोग़ हैदराबादी

जन्म जन्म की कहानी

फ़रखंदा नसरीन हयात

वो ख़ुदा है तो भला उस से शिकायत कैसी?

फरीहा नक़वी

मिरे हिज्र के फ़ैसले से डरो तुम

फरीहा नक़वी

मैं शाम से शायद डूबी थी

फरीहा नक़वी

हमारे कमरे में पत्तियों की महक ने

फरीहा नक़वी

एक पुराना ख़्वाब

फरीहा नक़वी

वो अगर अब भी कोई अहद निभाना चाहे

फरीहा नक़वी

उसे भूलने का सितम कर रहे हैं

फरीहा नक़वी

तुम्हें पाने की हैसिय्यत नहीं है

फरीहा नक़वी

शनासाई का सिलसिला देखती हूँ

फरीहा नक़वी

क्यूँ दिया था? बता! मेरी वीरानियों में सहारा मुझे

फरीहा नक़वी

बीते ख़्वाब की आदी आँखें कौन उन्हें समझाए

फरीहा नक़वी

ऐ मिरी ज़ात के सुकूँ आ जा

फरीहा नक़वी

याद आएँगे ज़माने को मिसालों के लिए

फ़ारिग़ बुख़ारी

तुम्हारे साथ ही उस को भी डूब जाना है

फ़ारिग़ बुख़ारी

सफ़र में कोई किसी के लिए ठहरता नहीं

फ़ारिग़ बुख़ारी

पुकारा जब मुझे तन्हाई ने तो याद आया

फ़ारिग़ बुख़ारी

अपने दरिया की प्यास

फ़ारिग़ बुख़ारी

यही है दौर-ए-ग़म-ए-आशिक़ी तो क्या होगा

फ़ारिग़ बुख़ारी

यादों का अजीब सिलसिला है

फ़ारिग़ बुख़ारी

याद आएँगे ज़माने को मिसालों के लिए

फ़ारिग़ बुख़ारी

वो रोज़-ओ-शब भी नहीं हैं वो रंग-ओ-बू भी नहीं

फ़ारिग़ बुख़ारी

वो रोज़-ओ-शब भी नहीं है वो रंग-ओ-बू भी नहीं

फ़ारिग़ बुख़ारी

वो रौशनी है कहाँ जिस के बाद साया नहीं

फ़ारिग़ बुख़ारी

तेरी ख़ातिर ये फ़ुसूँ हम ने जगा रक्खा है

फ़ारिग़ बुख़ारी

नश्शे में जो है कोहना शराबों से ज़ियादा

फ़ारिग़ बुख़ारी

मसीह-ए-वक़्त सही हम को उस से क्या लेना

फ़ारिग़ बुख़ारी