Heart Broken Poetry (page 129)
हम से तंहाई के मारे नहीं देखे जाते
फ़रहत शहज़ाद
हयात को तिरी दुश्वार किस तरह करता
फ़रहत शहज़ाद
दो झुकी आँखों का पहुँचा जब मिरे दिल को सलाम
फ़रहत शहज़ाद
दश्त-ए-वहशत ने फिर पुकारा है
फ़रहत शहज़ाद
आँख को जकड़े थे कल ख़्वाब अज़ाबों के
फ़रहत शहज़ाद
वो खुल कर मुझ से मिलता भी नहीं है
फ़रहत क़ादरी
था पा-शिकस्ता आँख मगर देखती तो थी
फ़रहत क़ादरी
शुऊर-ओ-फ़िक्र की तज्दीद का गुमाँ तो हुआ
फ़रहत क़ादरी
राज़ उबल पड़े आख़िर आसमाँ के सीनों से
फ़रहत क़ादरी
रातों के अंधेरों में ये लोग अजब निकले
फ़रहत क़ादरी
कोई धड़कन कोई उलझन कोई बंधन माँगे
फ़रहत क़ादरी
जितने लोग नज़र आते हैं सब के सब बेगाने हैं
फ़रहत क़ादरी
जब हर नज़र हो ख़ुद ही तजल्ली-नुमा-ए-ग़म
फ़रहत क़ादरी
आई ख़िज़ाँ चमन में गए दिन बहार के
फ़रहत क़ादरी
नहीं होती है राह-ए-इश्क़ में आसान मंज़िल
फ़रहत नदीम हुमायूँ
ये फुर्क़तों में लम्हा-ए-विसाल कैसे आ गया
फ़रहत नदीम हुमायूँ
था पहला सफ़र उस की रिफ़ाक़त भी नई थी
फ़रहत नदीम हुमायूँ
न दौलत की तलब थी और न दौलत चाहिए है
फ़रहत नदीम हुमायूँ
मोहब्बत का ये रुख़ देखा नहीं था
फ़रहत नदीम हुमायूँ
मसअला आज मिरे इश्क़ का तू हल कर दे
फ़रहत नदीम हुमायूँ
कोई अहद-ए-वफ़ा भूला हुआ हूँ
फ़रहत नदीम हुमायूँ
है वही एक मेरे सिवा और मैं
फ़रहत नदीम हुमायूँ
हाल में जीने की तदबीर भी हो सकती है
फ़रहत नदीम हुमायूँ
अब ज़िंदगी रो रो के गुज़ारेंगे नहीं हम
फ़रहत नदीम हुमायूँ
'फ़रहत' तिरे नग़मों की वो शोहरत है जहाँ में
फ़रहत कानपुरी
दिल की राहें जुदा हैं दुनिया से
फ़रहत कानपुरी
वो बहकी निगाहें क्या कहिए वो महकी जवानी क्या कहिए
फ़रहत कानपुरी
वस्ल के लम्हे कहानी हो गए
फ़रहत कानपुरी
मुँह-बोला बोल जगत का है जो मन में रहे सो अपना है
फ़रहत कानपुरी
मेरा दिल-ए-नाशाद जो नाशाद रहेगा
फ़रहत कानपुरी