Heart Broken Poetry (page 130)
कुछ तो वुफ़ूर-ए-शौक़ में बाइ'स-ए-इम्तियाज़ हो
फ़रहत कानपुरी
कोई भी हम-सफ़र नहीं होता
फ़रहत कानपुरी
इक ख़लिश सी है मुझे तक़दीर से
फ़रहत कानपुरी
आँखों में बसे हो तुम आँखों में अयाँ हो कर
फ़रहत कानपुरी
उसे ख़बर थी कि हम विसाल और हिज्र इक साथ चाहते हैं
फ़रहत एहसास
तभी वहीं मुझे उस की हँसी सुनाई पड़ी
फ़रहत एहसास
सख़्त तकलीफ़ उठाई है तुझे जानने में
फ़रहत एहसास
मेरी इक उम्र और इक अहद की तारीख़ रक़म है जिस पर
फ़रहत एहसास
कौन सी ऐसी ख़ुशी है जो मिली हो एक बार
फ़रहत एहसास
कभी इस रौशनी की क़ैद से बाहर भी निकलो तुम
फ़रहत एहसास
जान ये सरकशी-ए-जिस्म तिरे बस की नहीं
फ़रहत एहसास
इश्क़ में पीने का पानी बस आँख का पानी
फ़रहत एहसास
हिज्र ओ विसाल चराग़ हैं दोनों तन्हाई के ताक़ों में
फ़रहत एहसास
हर गली कूचे में रोने की सदा मेरी है
फ़रहत एहसास
हमें जब अपना तआ'रुफ़ करना पड़ता है
फ़रहत एहसास
हमें जब अपना तआ'रुफ़ कराना पड़ता है
फ़रहत एहसास
दो अलग लफ़्ज़ नहीं हिज्र ओ विसाल
फ़रहत एहसास
धूप बोली कि मैं आबाई वतन हूँ तेरा
फ़रहत एहसास
ऐ सदफ़ सुन तुझे फिर याद दिला देता हूँ
फ़रहत एहसास
तराना-ए-रेख़्ता
फ़रहत एहसास
तहरीर की फ़ुर्सत
फ़रहत एहसास
सुकूत
फ़रहत एहसास
साँप
फ़रहत एहसास
रात हुई
फ़रहत एहसास
पीला कुत्ता
फ़रहत एहसास
पेश-ओ-पस
फ़रहत एहसास
ख़ुद-आगही
फ़रहत एहसास
गुनाहों की धुँद
फ़रहत एहसास
दुनिया को कहाँ तक जाना है
फ़रहत एहसास
बिछड़े घर का साया
फ़रहत एहसास