Heart Broken Poetry (page 174)
फ़ज़ा-ए-आदमियत को सँवरने ही नहीं देते
चरण सिंह बशर
एक मरकज़ पे सिमट आई है सारी दुनिया
चरण सिंह बशर
आइना कौन है कुछ पता तो चले
चरण सिंह बशर
तय हुआ दिन कि खुले शाम के बिस्तर चलिए
चराग़ बरेलवी
समंदर का सुकूत
चन्द्रभान ख़याल
क़तरा क़तरा एहसास
चन्द्रभान ख़याल
लौट चलिए
चन्द्रभान ख़याल
जंग
चन्द्रभान ख़याल
गुम-शुदा आदमी का इंतिज़ार
चन्द्रभान ख़याल
सभी सम्तों को ठुकरा कर उड़ी जाए
चंद्र प्रकाश शाद
कैसा वो मौसम था ये तो समझ न पाए हम
चंद्र प्रकाश शाद
कभी हवा ने कभी उड़ते पत्थरों ने किया
चंद्र प्रकाश शाद
हर इक इम्कान तक पस्पाई है अपनी
चंद्र प्रकाश शाद
बदन को अपनी बिसात तक तो पसारना था
चंद्र प्रकाश शाद
वो क्या जवाब दे अर्ज़-ए-सवाल से पहले
चंद्र प्रकाश जौहर बिजनौरी
हिजाब बन के वो मेरी नज़र में रहता है
चंद्र प्रकाश जौहर बिजनौरी
ज़िंदगी की यही कहानी है
चाँदनी पांडे
वो काश मान लेता कभी हम-सफ़र मुझे
चाँदनी पांडे
उम्र के लम्बे सफ़र से तजरबा ऐसा मिला
चाँदनी पांडे
ख़त्म है बादल की जब से साएबानी धूप में
चाँदनी पांडे
जले चराग़ बुझाने की ज़िद नहीं करते
चाँदनी पांडे
एक मुद्दत से उसे देखा नहीं
चाँदनी पांडे
क्या हुस्न है यूसुफ़ भी ख़रीदार है तेरा
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
हर आरज़ू में रंग है बाग़-ओ-बहार का
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
फ़ित्ना-ए-रोज़गार की बातें
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
दिलकशी नाम को भी आलम-ए-इम्काँ में नहीं
चंद्रभान कैफ़ी देहल्वी
जो तू कहे तो शिकायत का ज़िक्र कम कर दें
चकबस्त ब्रिज नारायण
इस को ना-क़दरी-ए-आलम का सिला कहते हैं
चकबस्त ब्रिज नारायण
एक साग़र भी इनायत न हुआ याद रहे
चकबस्त ब्रिज नारायण
रामायण का एक सीन
चकबस्त ब्रिज नारायण