Heart Broken Poetry (page 175)
मर्सिया गोपाल कृष्ण गोखले
चकबस्त ब्रिज नारायण
ख़ाक-ए-हिंद
चकबस्त ब्रिज नारायण
हुब्ब-ए-क़ौमी
चकबस्त ब्रिज नारायण
आसिफ़ुद्दौला का इमामबाड़ा लखनऊ
चकबस्त ब्रिज नारायण
ज़बाँ को बंद करें या मुझे असीर करें
चकबस्त ब्रिज नारायण
उन्हें ये फ़िक्र है हर दम नई तर्ज़-ए-जफ़ा क्या है
चकबस्त ब्रिज नारायण
नए झगड़े निराली काविशें ईजाद करते हैं
चकबस्त ब्रिज नारायण
न कोई दोस्त दुश्मन हो शरीक-ए-दर्द-ओ-ग़म मेरा
चकबस्त ब्रिज नारायण
कुछ ऐसा पास-ए-ग़ैरत उठ गया इस अहद-ए-पुर-फ़न में
चकबस्त ब्रिज नारायण
फ़ना का होश आना ज़िंदगी का दर्द-ए-सर जाना
चकबस्त ब्रिज नारायण
दिल किए तस्ख़ीर बख़्शा फ़ैज़-ए-रूहानी मुझे
चकबस्त ब्रिज नारायण
दर्द-ए-दिल पास-ए-वफ़ा जज़्बा-ए-ईमाँ होना
चकबस्त ब्रिज नारायण
दर्द-ए-दिल पास-ए-वफ़ा जज़्बा-ए-ईमाँ होना
चकबस्त ब्रिज नारायण
अगर दर्द-ए-मोहब्बत से न इंसाँ आश्ना होता
चकबस्त ब्रिज नारायण
शिकन-अंदर-शिकन याद आ गया है
बुशरा ज़ैदी
सवाद-ए-शाम से डरता हुआ नज़र आया
बुशरा ज़ैदी
अब के बरस भी महका महका ख़्वाब दरीचा लगता है
बुशरा ज़ैदी
दिल के ज़ख़्मों की चुभन दीदा-ए-तर से पूछो
बुशरा हाश्मी
सर-ए-दश्त दिल जो सराब था कोई ख़्वाब था
बुशरा हाश्मी
दिल के ज़ख़्मों की चुभन दीदा-ए-तर से पूछो
बुशरा हाश्मी
अभी बादलों का सफ़र कहाँ मिरे मेहरबाँ
बुशरा हाश्मी
इक अज़िय्यत है तो लज़्ज़त भी तिरे दर्द में है
बुशरा फर्रुख
ब-ज़ाहिर तुझ से मिलने का कोई इम्काँ नहीं है
बुशरा फर्रुख
जब राख से उट्ठेगा कभी इश्क़ का शोला
बुशरा एजाज़
ये शहर-ए-ना-रसाई है
बुशरा एजाज़
उन्हें ढूँडो
बुशरा एजाज़
पंछी ते परदेसी.....
बुशरा एजाज़
मेरे ख़ामोश ख़ुदा
बुशरा एजाज़
मैं जब ख़ुद से बिछड़ती हूँ
बुशरा एजाज़
मोहब्बत में कोई सदमा उठाना चाहिए था
बुशरा एजाज़