Heart Broken Poetry (page 176)
मिरी रात मेरा चराग़ मेरी किताब दे
बुशरा एजाज़
मंज़रों के दरमियाँ मंज़र बनाना चाहिए
बुशरा एजाज़
दिल में है तलब और दुआ और तरह की
बुशरा एजाज़
शिकवा नसीब का न करे बार बार तू
बबल्स होरा सबा
मिरी ज़िंदगी है तन्हा तुम्हें कुछ असर तो होता
बबल्स होरा सबा
ख़ुशियाँ थीं बेवफ़ा न रहीं ज़िंदगी के साथ
बबल्स होरा सबा
ख़ुद को तमाशा ख़ूब बनाता रहा हूँ मैं
बबल्स होरा सबा
ख़ामुशी में क़यास मेरा है
बबल्स होरा सबा
जिस ने जाना जहाँ तमाशा है
बबल्स होरा सबा
जिस ने जाना जहाँ तमाशा है
बबल्स होरा सबा
बे-रुख़ी ने उस की कैसा ये इशारा कर दिया
बबल्स होरा सबा
बे-क़रारी दिल-ए-मुज़्तर की बढ़ाई हम ने
बबल्स होरा सबा
सुलगती रेत में इक चेहरा आब सा चमका
बृजेश अम्बर
आसमाँ है समुंदर पे छाया हुआ
बृजेश अम्बर
ज़ौ-बार इसी सम्त हुए शम्स-ओ-क़मर भी
ब्रहमा नन्द जलीस
यही समझा हूँ बस इतनी हुई है आगही मुझ को
ब्रहमा नन्द जलीस
तुझ से तसव्वुरात में ऐ जान-ए-आरज़ू
ब्रहमा नन्द जलीस
पूछते हैं बज़्म में सुन कर वो अफ़्साना मिरा
ब्रहमा नन्द जलीस
ऐ 'जलीस' अब इक तुम्हीं में आदमियत हो तो हो
ब्रहमा नन्द जलीस
जब ख़िज़ाँ आई चमन में सब दग़ा देने लगे
बूम मेरठी
इस क़दर बढ़ गई वहशत तिरे दीवाने की
बूम मेरठी
अल्लाह अल्लाह वस्ल की शब इस क़दर ए'जाज़ है
बूम मेरठी
अगर दुश्मन की थोड़ी सी मरम्मत और हो जाती
बूम मेरठी
ठोकर किसी पत्थर से अगर खाई है मैं ने
बिस्मिल सईदी
रो रहा हूँ आज मैं सारे जहाँ के सामने
बिस्मिल सईदी
किया तबाह तो दिल्ली ने भी बहुत 'बिस्मिल'
बिस्मिल सईदी
किसी के सितम इस क़दर याद आए
बिस्मिल सईदी
वही होती है रहबर जो तमन्ना दिल में होती है
बिस्मिल सईदी
सर जिस पे न झुक जाए उसे दर नहीं कहते
बिस्मिल सईदी
रह-रव-ए-राह-ए-मोहब्बत कौन सी मंज़िल में है
बिस्मिल सईदी