Heart Broken Poetry (page 193)

लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में

बशीर बद्र

कोई फूल धूप की पत्तियों में हरे रिबन से बँधा हुआ

बशीर बद्र

किसी की याद में पलकें ज़रा भिगो लेते

बशीर बद्र

ख़ुदा हम को ऐसी ख़ुदाई न दे

बशीर बद्र

ख़ानदानी रिश्तों में अक्सर रक़ाबत है बहुत

बशीर बद्र

कौन आया रास्ते आईना-ख़ाने हो गए

बशीर बद्र

कहीं चाँद राहों में खो गया कहीं चाँदनी भी भटक गई

बशीर बद्र

कभी यूँ भी आ मिरी आँख में कि मिरी नज़र को ख़बर न हो

बशीर बद्र

कभी तो शाम ढले अपने घर गए होते

बशीर बद्र

जब तक निगार-ए-दाश्त का सीना दुखा न था

बशीर बद्र

जब सहर चुप हो हँसा लो हम को

बशीर बद्र

जब रात की तन्हाई दिल बन के धड़कती है

बशीर बद्र

होंटों पे मोहब्बत के फ़साने नहीं आते

बशीर बद्र

हँसी मासूम सी बच्चों की कापी में इबारत सी

बशीर बद्र

हमारे पास तो आओ बड़ा अंधेरा है

बशीर बद्र

हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाए

बशीर बद्र

है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम है

बशीर बद्र

ग़ज़लों का हुनर अपनी आँखों को सिखाएँगे

बशीर बद्र

घर से निकले अगर हम बहक जाएँगे

बशीर बद्र

फ़लक से चाँद सितारों से जाम लेना है

बशीर बद्र

इक परी के साथ मौजों पर टहलता रात को

बशीर बद्र

दिल में इक तस्वीर छुपी थी आन बसी है आँखों में

बशीर बद्र

चाय की प्याली में नीली टेबलेट घोली

बशीर बद्र

भीगी हुई आँखों का ये मंज़र न मिलेगा

बशीर बद्र

बे-तहाशा सी ला-उबाली हँसी

बशीर बद्र

अगर यक़ीं नहीं आता तो आज़माए मुझे

बशीर बद्र

अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगा

बशीर बद्र

अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया

बशीर बद्र

अभी इस तरफ़ न निगाह कर मैं ग़ज़ल की पलकें सँवार लूँ

बशीर बद्र

अब तो अँगारों के लब चूम के सो जाएँगे

बशीर बद्र