Heart Broken Poetry (page 191)

ज़िंदगी तू ने मुझे क़ब्र से कम दी है ज़मीं

बशीर बद्र

यारो नए मौसम ने ये एहसान किए हैं

बशीर बद्र

वो शख़्स जिस को दिल ओ जाँ से बढ़ के चाहा था

बशीर बद्र

उस ने छू कर मुझे पत्थर से फिर इंसान किया

बशीर बद्र

उन्हीं रास्तों ने जिन पर कभी तुम थे साथ मेरे

बशीर बद्र

उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो

बशीर बद्र

उदास आँखों से आँसू नहीं निकलते हैं

बशीर बद्र

तुम मोहब्बत को खेल कहते हो

बशीर बद्र

शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है

बशीर बद्र

शबनम के आँसू फूल पर ये तो वही क़िस्सा हुआ

बशीर बद्र

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा

बशीर बद्र

फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे

बशीर बद्र

फिर याद बहुत आएगी ज़ुल्फ़ों की घनी शाम

बशीर बद्र

पत्थर मुझे कहता है मिरा चाहने वाला

बशीर बद्र

पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है

बशीर बद्र

नाम पानी पे लिखने से क्या फ़ाएदा

बशीर बद्र

न उदास हो न मलाल कर किसी बात का न ख़याल कर

बशीर बद्र

न जाने कब तिरे दिल पर नई सी दस्तक हो

बशीर बद्र

मुझे मालूम है उस का ठिकाना फिर कहाँ होगा

बशीर बद्र

मुद्दत से इक लड़की के रुख़्सार की धूप नहीं आई

बशीर बद्र

मिरे साथ चलने वाले तुझे क्या मिला सफ़र में

बशीर बद्र

मैं तमाम दिन का थका हुआ तू तमाम शब का जगा हुआ

बशीर बद्र

मैं जिस की आँख का आँसू था उस ने क़द्र न की

बशीर बद्र

मैं बोलता हूँ तो इल्ज़ाम है बग़ावत का

बशीर बद्र

लोबान में चिंगारी जैसे कोई रख जाए

बशीर बद्र

जिस दिन से चला हूँ मिरी मंज़िल पे नज़र है

बशीर बद्र

हर धड़कते पत्थर को लोग दिल समझते हैं

बशीर बद्र

हक़ीक़तों में ज़माना बहुत गुज़ार चुके

बशीर बद्र

हँसो आज इतना कि इस शोर में

बशीर बद्र

है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफ़र रहा न क़याम है

बशीर बद्र