Heart Broken Poetry (page 192)

ग़ज़लों ने वहीं ज़ुल्फ़ों के फैला दिए साए

बशीर बद्र

ग़ज़लों का हुनर अपनी आँखों को सिखाएँगे

बशीर बद्र

दुश्मनी का सफ़र इक क़दम दो क़दम

बशीर बद्र

दिल की बस्ती पुरानी दिल्ली है

बशीर बद्र

बिछी थीं हर तरफ़ आँखें ही आँखें

बशीर बद्र

अजब चराग़ हूँ दिन रात जलता रहता हूँ

बशीर बद्र

ये ज़र्द पत्तों की बारिश मिरा ज़वाल नहीं

बशीर बद्र

ये चराग़ बे-नज़र है ये सितारा बे-ज़बाँ है

बशीर बद्र

वो सूरत गर्द-ए-ग़म में छुप गई हो

बशीर बद्र

वो अपने घर चला गया अफ़्सोस मत करो

बशीर बद्र

वही ताज है वही तख़्त है वही ज़हर है वही जाम है

बशीर बद्र

उदासी आसमाँ है दिल मिरा कितना अकेला है

बशीर बद्र

उदास आँखों से आँसू नहीं निकलते हैं

बशीर बद्र

तारों भरी पलकों की बरसाई हुई ग़ज़लें

बशीर बद्र

सोए कहाँ थे आँखों ने तकिए भिगोए थे

बशीर बद्र

शबनम के आँसू फूल पर ये तो वही क़िस्सा हुआ

बशीर बद्र

सर से पा तक वो गुलाबों का शजर लगता है

बशीर बद्र

सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा

बशीर बद्र

रेत भरी है इन आँखों में आँसू से तुम धो लेना

बशीर बद्र

पिछली रात की नर्म चाँदनी शबनम की ख़ुनकी से रचा है

बशीर बद्र

फूल बरसे कहीं शबनम कहीं गौहर बरसे

बशीर बद्र

पत्थर के जिगर वालो ग़म में वो रवानी है

बशीर बद्र

पहला सा वो ज़ोर नहीं है मेरे दुख की सदाओं में

बशीर बद्र

मिरी ज़िंदगी भी मिरी नहीं ये हज़ार ख़ानों में बट गई

बशीर बद्र

मेरी आँखों में तिरे प्यार का आँसू आए

बशीर बद्र

मेरे सीने पर वो सर रक्खे हुए सोता रहा

बशीर बद्र

मेरे दिल की राख कुरेद मत इसे मुस्कुरा के हवा न दे

बशीर बद्र

मान मौसम का कहा छाई घटा जाम उठा

बशीर बद्र

मैं तुम को भूल भी सकता हूँ इस जहाँ के लिए

बशीर बद्र

मैं कब तन्हा हुआ था याद होगा

बशीर बद्र