Heart Broken Poetry (page 218)

न जाने कौन अपाहिज बना रहा है हमें

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

बहुत दिनों से इधर उस को याद भी न किया

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

अंधेरा इतना है अब शहर के मुहाफ़िज़ को

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

यही नहीं कि नज़र को झुकाना पड़ता है

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

वक़्त जब राह की दीवार हुआ

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

ख़ाक ओ ख़ला का हिसार और मैं

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

जुनूँ-नवाज़ सफ़र का ख़याल क्यूँ आया

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़

नशा टूटा नहीं है मार खा कर

अज़ीज़ अहमद

तिरी बातों में चिकनाई बहुत है

अज़ीज़ अहमद

किस लिए ख़ुद को समझता है वो पत्थर की लकीर

अज़ीम हैदर सय्यद

ज़मीं की ख़ाक तो अफ़्लाक से ज़ियादा है

अज़ीम हैदर सय्यद

सुकून-ए-दिल गया नज़रों से सब क़तारे गए

अज़ीम हैदर सय्यद

कौन वाँ जुब्बा-ओ-दस्तार में आ सकता है

अज़ीम हैदर सय्यद

सर पर मिरे उम्र-भर रही धूप

अज़हर सईद

चारासाज़ो मिरा इलाज करो

अज़हर नवाज़

सिलसिला यूँ भी रवा रक्खा शनासाई का

अज़हर नवाज़

पढ़िए सबक़ यही है वफ़ा की किताब का

अज़हर नवाज़

नींद पलकों पे यूँ रखी सी है

अज़हर नवाज़

न जाने शाम ने क्या कह दिया सवेरे से

अज़हर नवाज़

मिलते जुलते हैं यहाँ लोग ज़रूरत के लिए

अज़हर नवाज़

उतर कर पानियों में चाँद महव-ए-रक़्स रहता है

अज़हर नक़वी

शहर गुम-सुम रास्ते सुनसान घर ख़ामोश हैं

अज़हर नक़वी

नहीं है पर कोई इम्कान हो भी सकता है

अज़हर नक़वी

कोई ऐसी बात है जिस के डर से बाहर रहते हैं

अज़हर नक़वी

किनारों से जुदा होता नहीं तुग़्यानियों का दुख

अज़हर नक़वी

गिर्या-ए-शब की शहादत के लिए जागते हैं

अज़हर नक़वी

गिर्दाब-ए-रेग-ए-जान से मौज-ए-सराब तक

अज़हर नक़वी

एक इक साँस में सदियों का सफ़र काटते हैं

अज़हर नक़वी

दिल कुछ देर मचलता है फिर यादों में यूँ खो जाता है

अज़हर नक़वी

दर-पेश नहीं नक़्ल-ए-मकानी कई दिन से

अज़हर नक़वी