Heart Broken Poetry (page 219)

चाक-ए-दामान-ए-क़बा दाग़-ए-जुनूँ-साज़ बहुत

अज़हर नक़वी

अफ़्सुर्दगी-ए-दर्द-ए-फ़राक़त है सहर तक

अज़हर नक़वी

तुम बहर-ए-मोहब्बत के किनारे पे खड़े थे

अज़हर नैयर

ब-वक़्त-ए-शाम समुंदर में गिर गया सूरज

अज़हर नैयर

सच बोलना चाहें भी तो बोला नहीं जाता

अज़हर नैयर

मिरी दुनिया अकेली हो रही है

अज़हर नैयर

मैं महल रेत के सहरा में बनाने बैठा

अज़हर नैयर

जी रहा हूँ मैं उदासी भरी तस्वीर के साथ

अज़हर नैयर

इस को कोई ग़म नहीं है जिस का घर पत्थर का है

अज़हर नैयर

हुरूफ़ ख़ाली सदफ़ और निसाब ज़ख़्मों के

अज़हर नैयर

हरे दरख़्त का शाख़ों से रिश्ता टूट गया

अज़हर नैयर

हर एक राह में इम्कान-ए-हादिसा है अभी

अज़हर नैयर

हमारे चेहरे पे रंज-ओ-मलाल ऐसा था

अज़हर नैयर

हैरान हूँ कि आज ये क्या हादिसा हुआ

अज़हर नैयर

दरीचे सो गए शब जागती है

अज़हर नैयर

ये मोहब्बत का फ़साना भी बदल जाएगा

अज़हर लखनवी

जल्वे हवा के दोश ये कोई घटा के देख

अज़हर लखनवी

देखिए चलता है पैमाना किधर से पहले

अज़हर लखनवी

तू भी वफ़ा के रूप में अब ढल के देख ले

अज़हर जावेद

तुम्हारे आने की उम्मीद बर नहीं आती

अज़हर इक़बाल

न जाने ख़त्म हुई कब हमारी आज़ादी

अज़हर इक़बाल

एक मुद्दत से हैं सफ़र में हम

अज़हर इक़बाल

ये बार-ए-ग़म भी उठाया नहीं बहुत दिन से

अज़हर इक़बाल

वो माहताब अभी बाम पर नहीं आया

अज़हर इक़बाल

तुम्हारी याद के दीपक भी अब जलाना क्या

अज़हर इक़बाल

मुझ को वहशत हुई मिरे घर से

अज़हर इक़बाल

घुटन सी होने लगी उस के पास जाते हुए

अज़हर इक़बाल

दिल की गली में चाँद निकलता रहता है

अज़हर इक़बाल

वो तड़प जाए इशारा कोई ऐसा देना

अज़हर इनायती

उन के भी अपने ख़्वाब थे अपनी ज़रूरतें

अज़हर इनायती