Heart Broken Poetry (page 217)

एक मुद्दत से ख़यालों में बसा है जो शख़्स

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

धूप मेरी सारी रंगीनी उड़ा ले जाएगी

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

चमन पे बस न चला वर्ना ये चमन वाले

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

ज़िंदगी के सारे मौसम आ के रुख़्सत हो गए

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

ज़रा मुश्किल से समझेंगे हमारे तर्जुमाँ हम को

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

तू आया तो द्वार भिड़े थे दीप बुझा था आँगन का

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

थकन से चूर हूँ लेकिन रवाँ-दवाँ हूँ मैं

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

टटोलता हुआ कुछ जिस्म ओ जान तक पहुँचा

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

रूठ जाएगा तो मुझ से और क्या ले जाएगा

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

फूँक देंगे मिरे अंदर के उजाले मुझ को

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

पड़ा है ज़िंदगी के इस सफ़र से साबिक़ा अपना

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

न याद आया न भूला न सानेहा मुझ को

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

न जाने कब से बराबर मिरी तलाश में है

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

मुझे कहाँ मिरे अंदर से वो निकालेगा

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

मिरे मिज़ाज को सूरज से जोड़ता क्यूँ है

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

मैं उस की बात के लहजे का ए'तिबार करूँ

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

लहू से उठ के घटाओं के दिल बरसते हैं

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

ख़ुद में उतरूँगी तो मैं भी लापता हो जाऊँगी

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

हटा के मेज़ से इक रोज़ आईना मैं ने

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

एक दिए ने सदियों क्या क्या देखा है बतलाए कौन

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

अपनी बीती हुई रंगीन जवानी देगा

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

अलावा इक चुभन के क्या है ख़ुद से राब्ता मेरा

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

आप भी रेत का मल्बूस पहन कर देखें

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा

ये अपनी बेबसी है या कि अपनी बे-हिसी यारो

अज़ीज़ अन्सारी

फूल जो दिल की रहगुज़र में है

अज़ीज़ अन्सारी

कुछ ज़िंदगी में इश्क़-ओ-वफ़ा का हुनर भी रख

अज़ीज़ अन्सारी

हम उस को भूल बैठे हैं अँधेरे हम पे तारी हैं

अज़ीज़ अन्सारी

घर से बाहर निकल कर

अज़ीज़ अन्सारी

अच्छाई से नाता जोड़ वर्ना फिर पछताएगा

अज़ीज़ अन्सारी

रात इक शख़्स बहुत याद आया

अज़ीज अहमद ख़ाँ शफ़क़