Heart Broken Poetry (page 403)
दर्द से दिल ने वास्ता रक्खा
अातिश इंदौरी
बात बच्चों की थी लड़ने को सियाने निकले
अातिश इंदौरी
तुम्हें तो अपनी जफ़ाओं की ख़ूब दाद मिली
अातिश बहावलपुरी
मुझे भी इक सितमगर के करम से
अातिश बहावलपुरी
ख़ूगर-ए-लज़्ज़त-ए-आज़ार था इतना 'आतिश'
अातिश बहावलपुरी
गिला मुझ से था या मेरी वफ़ा से
अातिश बहावलपुरी
दर-हक़ीक़त इत्तिसाल-ए-जिस्म-ओ-जाँ है ज़िंदगी
अातिश बहावलपुरी
आप की हस्ती में ही मस्तूर हो जाता हूँ मैं
अातिश बहावलपुरी
ज़िंदगी गुज़री मिरी ख़ुश्क शजर की सूरत
अातिश बहावलपुरी
वो मेरे क़ल्ब को छेदेगा कब गुमान में था
अातिश बहावलपुरी
तुम्हें ज़ेबा नहीं हरगिज़ सिले की आरज़ू रखना
अातिश बहावलपुरी
सितम को उन का करम कहें हम जफ़ा को मेहर-ओ-वफ़ा कहें हम
अातिश बहावलपुरी
मुझे उन से मोहब्बत हो गई है
अातिश बहावलपुरी
लाख पर्दों में गो निहाँ हम थे
अातिश बहावलपुरी
ख़मोश बैठे हो क्यूँ साज़-ए-बे-सदा की तरह
अातिश बहावलपुरी
कमाल-ए-हुस्न का जिस से तुम्हें ख़ज़ाना मिला
अातिश बहावलपुरी
इब्तिदा बिगड़ी इंतिहा बिगड़ी
अातिश बहावलपुरी
हर्फ़-ए-शिकवा न लब पे लाओ तुम
अातिश बहावलपुरी
आप की हस्ती में ही मस्तूर हो जाता हूँ मैं
अातिश बहावलपुरी
रहज़नों के हाथ सारा इंतिज़ाम आया तो क्या
आतिफ़ वहीद 'यासिर'
मिरी राख में थीं कहीं कहीं मेरे एक ख़्वाब की किर्चियाँ
आतिफ़ वहीद 'यासिर'
किस के बदन की नर्मियाँ हाथों को गुदगुदा गईं
आतिफ़ वहीद 'यासिर'
तिरी दोस्ती का कमाल था मुझे ख़ौफ़ था न मलाल था
आतिफ़ वहीद 'यासिर'
रहज़नों के हाथ सारा इंतिज़ाम आया तो क्या
आतिफ़ वहीद 'यासिर'
आँखों को नक़्श-ए-पा तिरा दिल को ग़ुबार कर दिया
आतिफ़ वहीद 'यासिर'
तुम्हें गिला ही सही हम तमाशा करते हैं
आतिफ़ कमाल राना
फिर किसी हादसे का दर खोले
अस्नाथ कंवल
काग़ज़ क़लम दवात के अंदर रुक जाता है
अस्नाथ कंवल
इंतिहा होने से पहले सोच ले
अस्नाथ कंवल
तुम्हारी याद का साया न होगा
आसिम शहनवाज़ शिबली