Hope Poetry (page 137)
प्यास हर ज़र्रा-ए-सहरा की बुझाई गई है
अरशद जमाल 'सारिम'
पलट कर देखने का मुझ में यारा ही नहीं था
अरशद जमाल 'सारिम'
नित-नए नक़्श से बातिन को सजाता हुआ मैं
अरशद जमाल 'सारिम'
कहाँ कहाँ से सुनाऊँ तुम्हें फ़साना-ए-शब
अरशद जमाल 'सारिम'
जुड़े हुए हैं परी-ख़ाने मेरे काग़ज़ से
अरशद जमाल 'सारिम'
इज़्तिराब ऐसा हुआ दिल का सहारा मुझ को
अरशद जमाल 'सारिम'
बस कि इक लम्स की उम्मीद पे वारे हुए हैं
अरशद जमाल 'सारिम'
आँखों में ख़्वाब रख दिए ता'बीर छीन ली
अरशद जमाल हश्मी
उन वाइ'ज़ों की ज़िद से हम अब की बहार में
अरशद अली ख़ान क़लक़
सिंदूर उस की माँग में देता है यूँ बहार
अरशद अली ख़ान क़लक़
हुआ मैं रिंद-मशरब ख़ाक मर कर इस तमन्ना में
अरशद अली ख़ान क़लक़
बना कर तिल रुख़-ए-रौशन पर दो शोख़ी से से कहते हैं
अरशद अली ख़ान क़लक़
बहार आते ही ज़ख़्म-ए-दिल हरे सब हो गए मेरे
अरशद अली ख़ान क़लक़
ऐ बे-ख़ुदी-ए-दिल मुझे ये भी ख़बर नहीं
अरशद अली ख़ान क़लक़
आलम-ए-पीरी में क्या मू-ए-सियह का ए'तिबार
अरशद अली ख़ान क़लक़
ये जी में आता है जल जल के हर ज़माँ नासेह
अरशद अली ख़ान क़लक़
यगाना उन का बेगाना है बेगाना यगाना है
अरशद अली ख़ान क़लक़
वाइज़ की ज़िद से रिंदों ने रस्म-ए-जदीद की
अरशद अली ख़ान क़लक़
वा'दा-ख़िलाफ़ कितने हैं ऐ रश्क-ए-माह आप
अरशद अली ख़ान क़लक़
था क़स्द-ए-क़त्ल-ए-ग़ैर मगर मैं तलब हुआ
अरशद अली ख़ान क़लक़
तासीर जज़्ब मस्तों की हर हर ग़ज़ल में है
अरशद अली ख़ान क़लक़
सितम वो तुम ने किए भूले हम गिला दिल का
अरशद अली ख़ान क़लक़
शरफ़ इंसान को कब ज़िल्ल-ए-हुमा देता है
अरशद अली ख़ान क़लक़
साफ़ बातों से हो गया मा'लूम
अरशद अली ख़ान क़लक़
रोज़-ए-अव्वल से असीर ऐ दिल-ए-नाशाद हैं हम
अरशद अली ख़ान क़लक़
रग-ओ-पै में भरा है मेरे शोर उस की मोहब्बत का
अरशद अली ख़ान क़लक़
परतव-ए-रुख़ का तिरे दिल में गुज़र रहता है
अरशद अली ख़ान क़लक़
परतव पड़ा जो आरिज़-ए-गुलगून-ए-यार का
अरशद अली ख़ान क़लक़
नहीं चमके ये हँसने में तुम्हारे दाँत अंजुम से
अरशद अली ख़ान क़लक़
मिलता है क़ैद-ए-ग़म में भी लुत्फ़-ए-फ़ज़ा-ए-बाग़
अरशद अली ख़ान क़लक़