Hope Poetry (page 138)

लुत्फ़-ए-बहार मुश्फ़िक़-ए-मन देखते चलो

अरशद अली ख़ान क़लक़

जुनूँ बरसाए पत्थर आसमाँ ने मज़रा-ए-जाँ पर

अरशद अली ख़ान क़लक़

जो साक़िया तू ने पी के हम को दिया है जाम-ए-शराब आधा

अरशद अली ख़ान क़लक़

इश्क़ में तेरे जान-ए-ज़ार हैफ़ है मुफ़्त में चली

अरशद अली ख़ान क़लक़

हम ने एहसान असीरी का न बर्बाद किया

अरशद अली ख़ान क़लक़

हम तो हों दिल से दूर रहें पास और लोग

अरशद अली ख़ान क़लक़

गर दिल में कर के सैर-ए-दिल-ए-दाग़-दार देख

अरशद अली ख़ान क़लक़

डोरा नहीं है सुरमे का चश्म-ए-सियाह में

अरशद अली ख़ान क़लक़

दिल में आते ही ख़ुशी साथ ही इक ग़म आया

अरशद अली ख़ान क़लक़

बुत-परस्ती ने किया आशिक़-ए-यज़्दाँ मुझ को

अरशद अली ख़ान क़लक़

बुत-परस्ती ने किया आशिक़-ए-यज़्दाँ मुझ को

अरशद अली ख़ान क़लक़

बोलेगा कौन आशिक़-ए-नादार की तरफ़

अरशद अली ख़ान क़लक़

बे-ज़बानों को भी गोयाई सिखाना चाहिए

अरशद अली ख़ान क़लक़

बाक़ी न हुज्जत इक दम-ए-इसबात रह गई

अरशद अली ख़ान क़लक़

अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का

अरशद अली ख़ान क़लक़

आशिक़-ए-गेसू-ओ-क़द तेरे गुनहगार हैं सब

अरशद अली ख़ान क़लक़

आरिज़ में तुम्हारे क्या सफ़ा है

अरशद अली ख़ान क़लक़

मिट्टी को चूम लेने की हसरत ही रह गई

अरशद अब्दुल हमीद

मुझ को तक़दीर ने यूँ बे-सर-ओ-आसार किया

अरशद अब्दुल हमीद

मिले जो उस से तो यादों के पर निकल आए

अरशद अब्दुल हमीद

मेहर ओ महताब को मेरे ही निशाँ जानती है

अरशद अब्दुल हमीद

कोई भी शय हो मियाँ जान से प्यारी किसे है

अरशद अब्दुल हमीद

ख़ामोशी तक तो एक सदा ले गई मुझे

अरशद अब्दुल हमीद

जुनूँ के तौर हम इदराक ही से बाँधते हैं

अरशद अब्दुल हमीद

है टोंक अर्ज़-ए-पाक वहीं से उठेंगे हम

अरशद अब्दुल हमीद

ग़ज़ल में जान पड़ी गुफ़्तुगू में फूल खिले

अरशद अब्दुल हमीद

घटाएँ घिरती हैं बिजली कड़क के गिरती है

अरशद अब्दुल हमीद

फ़सील-ए-सब्र में रौज़न बनाना चाहती है

अरशद अब्दुल हमीद

चिराग़-ए-दर्द कि शम-ए-तरब पुकारती है

अरशद अब्दुल हमीद

देख रह जाए न तू ख़्वाहिश के गुम्बद में असीर

अर्श सिद्दीक़ी