Hope Poetry (page 140)

न हर्फ़-ए-शौक़ न तर्ज़-ए-बयाँ से आती है

अरमान नज्मी

मैं लिख कर हो सकूँगा सुर्ख़-रू क्या

अरमान नज्मी

जाने किस आलम-ए-एहसास में खोए हुए हैं

अरमान नज्मी

गिरते उभरते डूबते धारे से कट गया

अरमान नज्मी

दिमाग़-ओ-दिल पे हो क्या असर अँधेरे का

अरमान नज्मी

हम हैं और ज़ब्त-ए-फ़ुग़ाँ है आज-कल

अर्जुमंद बानो अफ़्शाँ

बदली हुई दुनिया की नज़र देख रहे हैं

अर्जुमंद बानो अफ़्शाँ

वो क्या मस्लहत थी

आरिफ़ा शहज़ाद

कैसा मातम कैसा रोना मिट्टी का

आरिफ़ शफ़ीक़

बादबाँ को गिला हवाओं से

आरिफ़ शफ़ीक़

तुम्हें प्यार है, तो यक़ीन दो,

आरिफ़ इशतियाक़

ज़िंदगी यूँ करें बसर कब तक

आरिफ़ इशतियाक़

तुम्हारी याद तारी हो रही है

आरिफ़ इशतियाक़

तुझे भी इश्क़ हुआ है ये किस ज़माने में

आरिफ़ इशतियाक़

मैं अब उक्ता गया हूँ फुर्क़तों से

आरिफ़ इशतियाक़

हर किसी के लिए दुआ करना

आरिफ़ इशतियाक़

गिला तिरे फ़िराक़ का जो आज-कल नहीं रहा

आरिफ़ इशतियाक़

आख़िरी ख़त मुझे मिला तेरा

आरिफ़ इशतियाक़

उस गली से मिरे गुज़रने तक

आरिफ़ इमाम

सुबू में अक्स-ए-रुख़-ए-माहताब देखते हैं

आरिफ़ इमाम

शायरी मुझ को अजब हाल में ले जाती है

आरिफ़ इमाम

नफ़स की आमद-ओ-शुद को वबाल कर के भी

आरिफ़ इमाम

वो कारवान-ए-बहाराँ कि बे-दरा होगा

आरिफ़ अब्दुल मतीन

रूह के जलते ख़राबे का मुदावा भी नहीं

आरिफ़ अब्दुल मतीन

मेरी सोच लरज़ उट्ठी है देख के प्यार का ये आलम

आरिफ़ अब्दुल मतीन

मैं जिस को राह दिखाऊँ वही हटाए मुझे

आरिफ़ अब्दुल मतीन

मैं अज़ल का राह-रौ मुझ को अबद की जुस्तुजू

आरिफ़ अब्दुल मतीन

कितनी हसरत से तिरी आँख का बादल बरसा

आरिफ़ अब्दुल मतीन

जो उभरे वक़्त के साँचे में ढल के

आरिफ़ अब्दुल मतीन

हम भी नादाँ हैं समझते हैं कि छट जाएगी

आरिफ़ अब्दुल मतीन