Hope Poetry (page 141)

ढूँढता हूँ सर-ए-सहरा-ए-तमन्ना ख़ुद को

आरिफ़ अब्दुल मतीन

छुपाए दिल में हम अक्सर तिरी तलब भी चले

आरिफ़ अब्दुल मतीन

चाँद मेरे घर में उतरा था कहीं डूबा न था

आरिफ़ अब्दुल मतीन

या ख़ुदा कुछ तो दर्द कम कर दे

आराधना प्रसाद

यूँ देखने में तो ऊपर से सख़्त हूँ शायद

अक़ील शादाब

शायद कोई कमी मेरे अंदर कहीं पे है

अक़ील शादाब

लिबास गर्द का और जिस्म नूर का निकला

अक़ील शादाब

बराए-नाम सही कोई मेहरबान तो है

अक़ील शादाब

शायद कहीं इस प्यार में थोड़ी सी कमी है

अक़ील नोमानी

कितने सवाल सब की निगाहों में रख दिए

अक़ील दानिश

ज़ीस्त करना दर-ए-इदराक से बाहर है अभी

अक़ील अब्बास जाफ़री

सुकून-ए-दिल न मयस्सर हुआ ज़माने में

अनवापुल हसन अनवार

अब तिरे हिज्र में यूँ उम्र बसर होती है

अनवापुल हसन अनवार

आया न आब-ए-रफ़्ता कभी जूएबार में

अनवापुल हसन अनवार

वो मक़्तल में अगर खींचे हुए तलवार बैठे हैं

अनवरी जहाँ बेगम हिजाब

मुहीत-ए-रहमत है जोश-अफ़ज़ा हुई है अब्र-ए-सख़ा की आमद

अनवरी जहाँ बेगम हिजाब

कहाँ मुमकिन है पोशीदा ग़म-ए-दिल का असर होना

अनवरी जहाँ बेगम हिजाब

मेरी नज़र के लिए कोई रिवायत न थी

अनवर सिद्दीक़ी

क्या शहर में है गर्मी-ए-बाज़ार के सिवा

अनवर सिद्दीक़ी

डुबोए देता है ख़ुद-आगही का बार मुझे

अनवर सिद्दीक़ी

अज़ाब-ए-हमसफ़री से गुरेज़ था मुझ को

अनवर सिद्दीक़ी

गो कठिन है तय करना उम्र का सफ़र तन्हा

अनवर शऊर

ज़हर की चुटकी ही मिल जाए बराए दर्द-ए-दिल

अनवर शऊर

ये ख़ुद को देखते रहने की है जो ख़ू मुझ में

अनवर शऊर

उस बज़्म में क्या कोई सुने राय हमारी

अनवर शऊर

उन से तन्हाई में बात होती रही

अनवर शऊर

टूटा तिलिस्म-ए-वक़्त तो क्या देखता हूँ मैं

अनवर शऊर

सुलैमान-ए-सुख़न तो ख़ैर क्या हूँ

अनवर शऊर

'शुऊर' वक़्त पे दिल की दवा हुई होती

अनवर शऊर

पियो कि मा-हसल-ए-होश किस ने देखा है

अनवर शऊर