Hope Poetry (page 47)
ये दिल ही जल्वा-गाह है उस ख़ुश-ख़िराम का
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
उस शोख़ से क्या कीजिए इज़्हार-ए-तमन्ना
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
महज़ूँ न हो 'हुज़ूर' अब आता है यार अपना
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
जो यूँ आप बैरून-ए-दर जाएँगे
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
जहाँ में कहाँ बाहम उल्फ़त रही है
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
जब से गया है वो मिरा ईमान-ए-ज़िंदगी
ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी
आप ही नाख़ुदा रहा हूँ मैं
ग़ुलाम रसूल तारिक़
तू सरहद-ए-ख़याल से आगे गुज़र गया
गुलाम जीलानी असग़र
अब के बाज़ार में ये तुर्फ़ा तमाशा देखा
गुलाम जीलानी असग़र
जफ़ा-ए-दिल-शिकन
ग़ुलाम दस्तगीर मुबीन
वक़ार दे के कभी बे-वक़ार मत करना
गुहर खैराबादी
तूफ़ान समुंदर के न दरिया के भँवर देख
गुहर खैराबादी
तारीकियों में अपनी ज़िया छोड़ जाऊँगा
गुहर खैराबादी
मैं ग़र्क़ वहाँ प्यास के पैकर की तरह था
गुहर खैराबादी
मैं इक मुसाफ़ि-ए-तन्हा मिरा सफ़र तन्हा
गुहर खैराबादी
ग़म नहीं जो लुट गए हम आ के मंज़िल के क़रीब
गुहर खैराबादी
दिल के दामन में जो सरमाया-ए-अफ़्कार न था
गुहर खैराबादी
चराग़ से कभी तारों से रौशनी माँगे
गुहर खैराबादी
बे-ख़बर कैसे हो रहे हो तुम
गुहर खैराबादी
वो तिफ़्ल-ए-नुसैरी आए शायद
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
ये इक तेरा जल्वा सनम चार सू है
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
उल्फ़त ये छुपाएँ हम किसी की
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
तुम वफ़ा का एवज़ जफ़ा समझे
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
क़त्ल उश्शाक़ किया करते हैं
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
नज़्ज़ारा-ए-रुख़-ए-साक़ी से मुझ को मस्ती है
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
लब-ए-जाँ-बख़्श पे दम अपना फ़ना होता है
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
क्यूँकर न ख़ुश हो सर मिरा लटक्का के दार में
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
क्या हैं शैदा-ए-क़द्द-ए-यार दरख़्त
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
हसरत ऐ जाँ शब-ए-जुदाई है
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
दुआएँ माँगीं हैं मुद्दतों तक झुका के सर हाथ उठा उठा कर
गोया फ़क़ीर मोहम्मद