Hope Poetry (page 52)
हिकायत-ए-इश्क़ से भी दिल का इलाज मुमकिन नहीं कि अब भी
ग़ुलाम हुसैन साजिद
एक ख़्वाहिश है जो शायद उम्र भर पूरी न हो
ग़ुलाम हुसैन साजिद
उफ़ुक़ से आग उतर आई है मिरे घर भी
ग़ुलाम हुसैन साजिद
सुब्ह तक जिन से बहुत बेज़ार हो जाता हूँ मैं
ग़ुलाम हुसैन साजिद
समझते हैं जो अपने बाप की जागीर मिट्टी को
ग़ुलाम हुसैन साजिद
रुका हूँ किस के वहम में मिरे गुमान में नहीं
ग़ुलाम हुसैन साजिद
क़र्या-ए-हैरत में दिल का मुस्तक़र इक ख़्वाब है
ग़ुलाम हुसैन साजिद
नुमूद पाते हैं मंज़रों की शिकस्त से फ़तह के बहाने
ग़ुलाम हुसैन साजिद
नहीं है इस नींद के नगर में अभी किसी को दिमाग़ मेरा
ग़ुलाम हुसैन साजिद
नहीं आसाँ किसी के वास्ते तख़्मीना मेरा
ग़ुलाम हुसैन साजिद
मिरी विरासत में जो भी कुछ है वो सब इसी दहर के लिए है
ग़ुलाम हुसैन साजिद
मिरी सुब्ह-ए-ख़्वाब के शहर पर यही इक जवाज़ है जब्र का
ग़ुलाम हुसैन साजिद
मिरे नज्म-ए-ख़्वाब के रू-ब-रू कोई शय नहीं मिरे ढंग की
ग़ुलाम हुसैन साजिद
मता-ए-दीद तो क्या जानिए किस से इबारत है
ग़ुलाम हुसैन साजिद
मता-ए-बर्ग-ओ-समर वही है शबाहत-ए-रंग-ओ-बू वही है
ग़ुलाम हुसैन साजिद
मसाफ़त-ए-उम्र में ज़ियाँ का हिसाब होता है जुस्तुजू से
ग़ुलाम हुसैन साजिद
मैं अपने सूरज के साथ ज़िंदा रहूँगा तो ये ख़बर मिलेगी
ग़ुलाम हुसैन साजिद
लरज़ जाता है थोड़ी देर को तार-ए-नफ़स मेरा
ग़ुलाम हुसैन साजिद
लहू की आग अगर जलती रहेगी
ग़ुलाम हुसैन साजिद
कोई जब छीन लेता है मता-ए-सब्र मिट्टी से
ग़ुलाम हुसैन साजिद
किस ने दी आवाज़ ''सिपर की ओट में था''
ग़ुलाम हुसैन साजिद
ख़ुदा-ए-बर्तर ने आसमाँ को ज़मीन पर मेहरबाँ किया है
ग़ुलाम हुसैन साजिद
कहीं मोहब्बत के आसमाँ पर विसाल का चाँद ढल रहा है
ग़ुलाम हुसैन साजिद
इश्क़ की दस्तरस में कुछ भी नहीं
ग़ुलाम हुसैन साजिद
हुदूद-ए-क़र्या-ए-वहम-ओ-गुमाँ में कोई नहीं
ग़ुलाम हुसैन साजिद
एक घर अपने लिए तय्यार करना है मुझे
ग़ुलाम हुसैन साजिद
दस्त-ए-राहत ने कभी रँज-ए-गिराँ-बारी ने
ग़ुलाम हुसैन साजिद
चराग़-ए-ख़ाना-ए-दिल को सुपुर्द-ए-बाद कर दूँ
ग़ुलाम हुसैन साजिद
चराग़ की ओट में रुका है जो इक हयूला सा यासमीं का
ग़ुलाम हुसैन साजिद
चराग़ की ओट में है मेहराब पर सितारा
ग़ुलाम हुसैन साजिद