Hope Poetry (page 51)
राज़-ए-दिल दोस्त को सुना बैठे
ग़ुलाम मौला क़लक़
पी भी ऐ माया-ए-शबाब शराब
ग़ुलाम मौला क़लक़
न पहुँचे हाथ जिस का ज़ोफ़ से ता-ज़ीस्त दामन तक
ग़ुलाम मौला क़लक़
न हो आरज़ू कुछ यही आरज़ू है
ग़ुलाम मौला क़लक़
मातम-ए-दीद है दीदार का ख़्वाहाँ होना
ग़ुलाम मौला क़लक़
क्या कहें तुझ से हम वफ़ा क्या है
ग़ुलाम मौला क़लक़
क्या आ के जहाँ में कर गए हम
ग़ुलाम मौला क़लक़
कोई कैसा ही साबित हो तबीअ'त आ ही जाती है
ग़ुलाम मौला क़लक़
किस क़दर दिलरुबा-नुमा है दिल
ग़ुलाम मौला क़लक़
ख़ुशी में भी नवा-संज-ए-फ़ुग़ाँ हूँ
ग़ुलाम मौला क़लक़
ख़त ज़मीं पर न ऐ फ़ुसूँ-गर काट
ग़ुलाम मौला क़लक़
कहिए क्या और फ़ैसले की बात
ग़ुलाम मौला क़लक़
जो दिलबर की मोहब्बत दिल से बदले
ग़ुलाम मौला क़लक़
जौहर-ए-आसमाँ से क्या न हुआ
ग़ुलाम मौला क़लक़
हम तो याँ मरते हैं वाँ उस को ख़बर कुछ भी नहीं
ग़ुलाम मौला क़लक़
हो जुदा ऐ चारा-गर है मुझ को आज़ार-ए-फ़िराक़
ग़ुलाम मौला क़लक़
है ख़मोशी-ए-इंतिज़ार बला
ग़ुलाम मौला क़लक़
दूरी में क्यूँ कि हो न तमन्ना हुज़ूर की
ग़ुलाम मौला क़लक़
दोस्ती उस की दुश्मनी ही सही
ग़ुलाम मौला क़लक़
दीदा-ए-सर्फ़-ए-इंतिज़ार है शम्अ
ग़ुलाम मौला क़लक़
चल दिए हम ऐ ग़म-ए-आलम विदाअ'
ग़ुलाम मौला क़लक़
ऐ सितम-आज़मा जफ़ा कब तक
ग़ुलाम मौला क़लक़
ऐ ख़ार ख़ार-ए-हसरत क्या क्या फ़िगार हैं हम
ग़ुलाम मौला क़लक़
आए क्या तेरा तसव्वुर ध्यान में
ग़ुलाम मौला क़लक़
ये आब-ओ-ताब इसी मरहले पे ख़त्म नहीं
ग़ुलाम हुसैन साजिद
सितारा-ए-ख़्वाब से भी बढ़ कर ये कौन बे-मेहर है कि जिस ने
ग़ुलाम हुसैन साजिद
रुका हूँ किस के वहम में मिरे गुमान में नहीं
ग़ुलाम हुसैन साजिद
नशात-ए-इज़हार पर अगरचे रवा नहीं ए'तिबार करना
ग़ुलाम हुसैन साजिद
जिस क़दर महमेज़ करता हूँ मैं 'साजिद' वक़्त को
ग़ुलाम हुसैन साजिद
इस अँधेरे में चराग़-ए-ख़्वाब की ख़्वाहिश नहीं
ग़ुलाम हुसैन साजिद