Islamic Poetry (page 29)
किसी के एक इशारे में किस को क्या न मिला
फ़ानी बदायुनी
की वफ़ा यार से एक एक जफ़ा के बदले
फ़ानी बदायुनी
ख़ुदा असर से बचाए इस आस्ताने को
फ़ानी बदायुनी
जल्वा-ए-इश्क़ हक़ीक़त थी हुस्न-ए-मजाज़ बहाना था
फ़ानी बदायुनी
जब पुर्सिश-ए-हाल वो फ़रमाते हैं जानिए क्या हो जाता है
फ़ानी बदायुनी
जब दिल में तिरे ग़म ने हसरत की बना डाली
फ़ानी बदायुनी
इश्क़ इश्क़ हो शायद हुस्न में फ़ना हो कर
फ़ानी बदायुनी
हम मौत भी आए तो मसरूर नहीं होते
फ़ानी बदायुनी
हो काश वफ़ा वादा-ए-फ़र्दा-ए-क़यामत
फ़ानी बदायुनी
दुनिया-ए-हुस्न-ओ-इश्क़ में किस का ज़ुहूर था
फ़ानी बदायुनी
दुनिया मेरी बला जाने महँगी है या सस्ती है
फ़ानी बदायुनी
दिल की तरफ़ हिजाब-ए-तकल्लुफ़ उठा के देख
फ़ानी बदायुनी
दिल की हर लर्ज़िश-ए-मुज़्तर पे नज़र रखते हैं
फ़ानी बदायुनी
दिल और दिल में याद किसी ख़ुश-ख़िराम की
फ़ानी बदायुनी
डरो न तुम कि न सुन ले कहीं ख़ुदा मेरी
फ़ानी बदायुनी
अपनी जन्नत मुझे दिखला न सका तू वाइज़
फ़ानी बदायुनी
ऐ बे-ख़ुदी ठहर कि बहुत दिन गुज़र गए
फ़ानी बदायुनी
अब उन्हें अपनी अदाओं से हिजाब आता है
फ़ानी बदायुनी
अब लब पे वो हंगामा-ए-फ़रियाद नहीं है
फ़ानी बदायुनी
आह से या आह की तासीर से
फ़ानी बदायुनी
जब सफ़ीना मौज से टकरा गया
फ़ना निज़ामी कानपुरी
जब भी नज़्म-ए-मै-कदा बदला गया
फ़ना निज़ामी कानपुरी
हम आगही-ए-इश्क़ का अफ़्साना कहेंगे
फ़ना निज़ामी कानपुरी
ये तमन्ना है कि इस तरह मुसलमाँ होता
फ़ना बुलंदशहरी
तेरे दर से न उठा हूँ न उठूँगा ऐ दोस्त
फ़ना बुलंदशहरी
माइल-ब-करम मुझ पर हो जाएँ तो अच्छा हो
फ़ना बुलंदशहरी
किस तरह छोड़ दूँ ऐ यार मैं चाहत तेरी
फ़ना बुलंदशहरी
किस को सुनाऊँ हाल-ए-ग़म कोई ग़म-आश्ना नहीं
फ़ना बुलंदशहरी
काफ़िर-ए-इश्क़ को क्या से क्या कर दिया
फ़ना बुलंदशहरी
हुस्न-ए-बुताँ का इश्क़ मेरी जान हो गया
फ़ना बुलंदशहरी