Islamic Poetry (page 28)
शिकस्त-ए-आसमाँ हो जाऊँगा मैं
फ़रहान सालिम
मैं तिरे संग कैसे चलूँ हम-सफ़र तू समुंदर है मैं साहिलों की हवा
फ़रहान सालिम
खो बैठी है सारे ख़द-ओ-ख़ाल अपनी ये दुनिया
फ़रहान सालिम
आम है इज़्न कि जो चाहो हवा पर लिख दो
फ़रहान सालिम
काग़ज़ के फूल
फ़रीद इशरती
है दाग़ दाग़ मिरा दिल मगर मलूल नहीं
फ़रीद इशरती
सदा-ए-कुन से भी पहले किसी जहान में थे
फ़राज़ महमूद फ़ारिज़
लबों के सामने ख़ाली गिलास रखते हैं
फ़राग़ रोहवी
कभी हरीफ़ कभी हम-नवा हमीं ठहरे
फ़राग़ रोहवी
कश्ती-ए-ए'तिबार तोड़ के देख
फ़ानी बदायुनी
दिल-ए-मरहूम को ख़ुदा बख़्शे
फ़ानी बदायुनी
ज़ब्त अपना शिआर था न रहा
फ़ानी बदायुनी
ज़बाँ मुद्दआ-आश्ना चाहता हूँ
फ़ानी बदायुनी
यूँ नज़्म-ए-जहाँ दरहम-ओ-बरहम न हुआ था
फ़ानी बदायुनी
वो मश्क़-ए-ख़ू-ए-तग़ाफ़ुल फिर एक बार रहे
फ़ानी बदायुनी
वो कहते हैं कि है टूटे हुए दिल पर करम मेरा
फ़ानी बदायुनी
वा-ए-नादानी ये हसरत थी कि होता दर खुला
फ़ानी बदायुनी
तेरा निगाह-ए-शौक़ कोई राज़-दाँ न था
फ़ानी बदायुनी
सितम-ईजाद रहोगे सितम-ईजाद रहे
फ़ानी बदायुनी
सवाल-ए-दीद पे तेवरी चढ़ाई जाती है
फ़ानी बदायुनी
क़िस्सा-ए-ज़ीस्त मुख़्तसर करते
फ़ानी बदायुनी
न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मा'लूम
फ़ानी बदायुनी
मोहताज-ए-अजल क्यूँ है ख़ुद अपनी क़ज़ा हो जा
फ़ानी बदायुनी
मेरे लब पर कोई दुआ ही नहीं
फ़ानी बदायुनी
लुत्फ़ ओ करम के पुतले हो अब क़हर ओ सितम का नाम नहीं
फ़ानी बदायुनी
ले ए'तिबार-ए-वादा-ए-फ़र्दा नहीं रहा
फ़ानी बदायुनी
क्यूँ न नैरंग-ए-जुनूँ पर कोई क़ुर्बां हो जाए
फ़ानी बदायुनी
क्या कहिए कि बेदाद है तेरी बेदाद
फ़ानी बदायुनी
कुछ कम तो हुआ रंज-ए-फ़रावान-ए-तमन्ना
फ़ानी बदायुनी
कुछ बस ही न था वर्ना ये इल्ज़ाम न लेते
फ़ानी बदायुनी