Islamic Poetry (page 26)

वो ख़ुदा है तो भला उस से शिकायत कैसी?

फरीहा नक़वी

वो अगर अब भी कोई अहद निभाना चाहे

फरीहा नक़वी

यादों का अजीब सिलसिला है

फ़ारिग़ बुख़ारी

कुछ अब के बहारों का भी अंदाज़ नया है

फ़ारिग़ बुख़ारी

इस औज पर न उछालो मुझे हवा कर के

फ़ारिग़ बुख़ारी

हवास लूट लिए शोरिश-ए-तमन्ना ने

फ़ारिग़ बुख़ारी

हम से तंहाई के मारे नहीं देखे जाते

फ़रहत शहज़ाद

दो झुकी आँखों का पहुँचा जब मिरे दिल को सलाम

फ़रहत शहज़ाद

राज़ उबल पड़े आख़िर आसमाँ के सीनों से

फ़रहत क़ादरी

आई ख़िज़ाँ चमन में गए दिन बहार के

फ़रहत क़ादरी

मसअला आज मिरे इश्क़ का तू हल कर दे

फ़रहत नदीम हुमायूँ

है वही एक मेरे सिवा और मैं

फ़रहत नदीम हुमायूँ

वो बहकी निगाहें क्या कहिए वो महकी जवानी क्या कहिए

फ़रहत कानपुरी

कुछ तो वुफ़ूर-ए-शौक़ में बाइ'स-ए-इम्तियाज़ हो

फ़रहत कानपुरी

जो कुछ भी है नज़र में सो वहम-ए-नुमूद है

फ़रहत कानपुरी

आँखों में बसे हो तुम आँखों में अयाँ हो कर

फ़रहत कानपुरी

तमाम पैकर-ए-बदसूरती है मर्द की ज़ात

फ़रहत एहसास

ऐ ख़ुदा मेरी रगों में दौड़ जा

फ़रहत एहसास

उस तरफ़

फ़रहत एहसास

तराना-ए-रेख़्ता

फ़रहत एहसास

लहर का ठहराओ

फ़रहत एहसास

ज़मीं ने लफ़्ज़ उगाया नहीं बहुत दिन से

फ़रहत एहसास

ये सारे ख़ूबसूरत जिस्म अभी मर जाने वाले हैं

फ़रहत एहसास

वो महफ़िलें पुरानी अफ़्साना हो रही हैं

फ़रहत एहसास

वहाँ मैं जाऊँ मगर कुछ मिरा भला भी तो हो

फ़रहत एहसास

सूने सियाह शहर पे मंज़र-पज़ीर मैं

फ़रहत एहसास

साहिब-ए-इश्क़ अब इतनी सी तो राहत मुझे दे

फ़रहत एहसास

सब ने'मतें हैं शहर में इंसान ही नहीं

फ़रहत एहसास

सब मिरा आब-ए-रवाँ किस के इशारों पे बहा जाता है

फ़रहत एहसास

रक़्स-ए-इल्हाम कर रहा हूँ

फ़रहत एहसास