Islamic Poetry (page 30)
हर घड़ी पेश-ए-नज़र इश्क़ में क्या क्या न रहा
फ़ना बुलंदशहरी
हाँ वही इश्क़-ओ-मोहब्बत की जिला होती है
फ़ना बुलंदशहरी
दिल बुतों पे निसार करते हैं
फ़ना बुलंदशहरी
ऐ सनम तुझ को हम भुला न सके
फ़ना बुलंदशहरी
कुछ बात नहीं जिस्म अगर मेरा जला है
फख्र ज़मान
जाएँगे कहाँ सर पे जब आ जाएगा सूरज
फख्र ज़मान
पड़ गया है ख़ुदा से काम मुझे
फ़ैज़ी
इस लिए दिल बुरा किया ही नहीं
फ़ैज़ी
बहुत सा काम तो पहले ही कर लिया मैं ने
फ़ैज़ान हाशमी
जब तक मिज़ाज-ए-दोस्त में कुछ बरहमी रही
फ़ैज़ुल हसन
वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
व-यबक़ा-वज्ह-ओ-रब्बिक
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
तीन आवाज़ें
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शोरिश-ए-ज़ंजीर बिस्मिल्लाह
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
मदह
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ख़ुदा वो वक़्त न लाए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
इंतिसाब
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
इधर न देखो
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हम तो मजबूर-ए-वफ़ा हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
गाँव की सड़क
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
एक रह-गुज़र पर
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
दुआ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
दरीचा
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
दाग़िस्तानी ख़ातून और शाएर बेटा
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
चंद रोज़ और मिरी जान
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
सितम सिखलाएगा रस्म-ए-वफ़ा ऐसे नहीं होता
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हुस्न मरहून-ए-जोश-ए-बादा-ए-नाज़
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़