Islamic Poetry (page 64)

दावत

अख़्तर शीरानी

बस्ती की लड़कियों के नाम

अख़्तर शीरानी

बदनाम हो रहा हूँ

अख़्तर शीरानी

ज़मान-ए-हिज्र मिटे दौर-ए-वस्ल-ए-यार आए

अख़्तर शीरानी

यक़ीन-ए-वादा नहीं ताब-ए-इंतिज़ार नहीं

अख़्तर शीरानी

वो कहते हैं रंजिश की बातें भुला दें

अख़्तर शीरानी

उन को बुलाएँ और वो न आएँ तो क्या करें

अख़्तर शीरानी

मोहब्बत की दुनिया में मशहूर कर दूँ

अख़्तर शीरानी

हर एक जल्वा-ए-रंगीं मिरी निगाह में है

अख़्तर शीरानी

अगर वो अपने हसीन चेहरे को भूल कर बे-नक़ाब कर दे

अख़्तर शीरानी

राह-ए-वफ़ा में कोई हमें जानता न था

अख़तर शाहजहाँपुरी

दिल बहलने के वसीले दे गया वो

अख़तर शाहजहाँपुरी

ना-उमीदी हर्फ़-ए-तोहमत ही सही क्या कीजिए

अख़्तर सईद ख़ान

किसी के तुम हो किसी का ख़ुदा है दुनिया में

अख़्तर सईद ख़ान

किस जुर्म-ए-आरज़ू की सज़ा है ये ज़िंदगी

अख़्तर सईद ख़ान

तुम से छुट कर ज़िंदगी का नक़्श-ए-पा मिलता नहीं

अख़्तर सईद ख़ान

मुद्दत से लापता है ख़ुदा जाने क्या हुआ

अख़्तर सईद ख़ान

लब-ए-सुकूत पे इक हर्फ़-ए-बे-नवा भी नहीं

अख़्तर सईद ख़ान

लम्स-ए-आख़िरी

अख़्तर पयामी

नश्तर से आरज़ू के दिल-ए-ज़िंदगी फ़िगार

अख़्तर ओरेनवी

मक़ाम-ए-दिल बहुत ऊँचा बना है

अख़्तर ओरेनवी

न समझ सकी जो दुनिया ये ज़बान-ए-बे-ज़बानी

अख़तर मुस्लिमी

कहाँ जाएँ छोड़ के हम उसे कोई और उस के सिवा भी है

अख़तर मुस्लिमी

किसी का चेहरा किसी पर सजा नहीं देता

अख्तर लख़नवी

दिल में इक जज़्बा-ए-बेदाद-ओ-जफ़ा ही होगा

अख़्तर होशियारपुरी

ज़बान बंद रही दिल का मुद्दआ' न कहा

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

न राज़-ए-इब्तिदा समझो न राज़-ए-इंतिहा समझो

अख़्तर अंसारी अकबराबादी

सीना ख़ूँ से भरा हुआ मेरा

अख़्तर अंसारी

मैं दिल को चीर के रख दूँ ये एक सूरत है

अख़्तर अंसारी

कोई मआल-ए-मोहब्बत मुझे बताओ नहीं

अख़्तर अंसारी