Islamic Poetry (page 65)
ख़्वाहिश-ए-ऐश नहीं दर्द-ए-निहानी की क़सम
अख़्तर अंसारी
मक़्तल
अख़लाक़ अहमद आहन
जला के दिल को रखा सुब्ह-ओ-शाम रोज़-ओ-शब
अख़लाक़ अहमद आहन
अकेले अकेले ही पा ली रिहाई
अख़लाक़ अहमद आहन
मुलाहिज़ा हो मिरी भी उड़ान पिंजरे में
अखिलेश तिवारी
वो हज़ार हम पे जफ़ा सही कोई शिकवा फिर भी रवा नहीं
अख़गर मुशताक़ रहीमाबादी
ये सारे फूल ये पत्थर उसी से मिलते हैं
अकबर मासूम
ख़ुद-परस्ती ख़ुदा न बन जाए
अकबर हैदराबादी
सितम-ज़दा कई बशर क़दम क़दम पे थे
अकबर हैदराबादी
दिल है न निशान बे-दिली का
अकबर हुसैन मोहानी इबरत
नाम 'अकबर' तो मिरा माँ की दुआ ने रक्खा
अकबर हमीदी
काफ़िर था मैं ख़ुदा का न मुंकिर दुआ का था
अकबर हमीदी
तय्यार थे नमाज़ पे हम सुन के ज़िक्र-ए-हूर
अकबर इलाहाबादी
सिधारें शैख़ काबा को हम इंग्लिस्तान देखेंगे
अकबर इलाहाबादी
सब हो चुके हैं उस बुत-ए-काफ़िर-अदा के साथ
अकबर इलाहाबादी
रक़ीबों ने रपट लिखवाई है जा जा के थाने में
अकबर इलाहाबादी
रहता है इबादत में हमें मौत का खटका
अकबर इलाहाबादी
ख़ुदा से माँग जो कुछ माँगना है ऐ 'अकबर'
अकबर इलाहाबादी
जब मैं कहता हूँ कि या अल्लाह मेरा हाल देख
अकबर इलाहाबादी
हर ज़र्रा चमकता है अनवार-ए-इलाही से
अकबर इलाहाबादी
फ़लसफ़ी को बहस के अंदर ख़ुदा मिलता नहीं
अकबर इलाहाबादी
बुतों के पहले बंदे थे मिसों के अब हुए ख़ादिम
अकबर इलाहाबादी
बुत-कदे में शोर है 'अकबर' मुसलमाँ हो गया
अकबर इलाहाबादी
अक़्ल में जो घिर गया ला-इंतिहा क्यूँकर हुआ
अकबर इलाहाबादी
अब तो है इश्क़-ए-बुताँ में ज़िंदगानी का मज़ा
अकबर इलाहाबादी
मदरसा अलीगढ़
अकबर इलाहाबादी
फ़र्ज़ी लतीफ़ा
अकबर इलाहाबादी
बर्क़-ए-कलीसा
अकबर इलाहाबादी
ज़िद है उन्हें पूरा मिरा अरमाँ न करेंगे
अकबर इलाहाबादी
ये सुस्त है तो फिर क्या वो तेज़ है तो फिर क्या
अकबर इलाहाबादी