Islamic Poetry (page 67)
सन्नाटा तूफ़ाँ से सिवा हो ये भी तो हो सकता है
अकबर अली खान अर्शी जादह
आज यूँ मुझ से मिला है कि ख़फ़ा हो जैसे
अकबर अली खान अर्शी जादह
मैं ने ऐ दिल तुझे सीने से लगाया हुआ है
अजमल सिराज
तिरी नज़र भी नहीं हर्फ़-ए-मुद्दआ भी नहीं
अजमल अजमली
हम को याद न आओ अब
अजीत सिंह हसरत
हर ख़ुदा जन्नतों में है महदूद
अजय सहाब
शाम आई है लिए हाथ में यादों के चराग़
अजय सहाब
सहरा-ए-ला-हुदूद में तिश्ना-लबी की ख़ैर
अजय सहाब
फ़न जो मेआ'र तक नहीं पहुँचा
अजय सहाब
अश्कों से कब मिटे हैं दामन के दाग़ यारो
अजय सहाब
फूल थे रंग थे लम्हों की सबाहत हम थे
ऐतबार साजिद
कहा दिन को भी ये घर किस लिए वीरान रहता है
ऐतबार साजिद
कलाम-ए-मीर समझे और ज़बान-ए-मीरज़ा समझे
ऐश देहलवी
फूल अल्लाह ने बनाए हैं महकने के लिए
ऐश देहलवी
फिरा किसी का इलाही किसी से यार न हो
ऐश देहलवी
न छोड़ी ग़म ने मिरे इक जिगर में ख़ून की बूँद
ऐश देहलवी
मैं बुरा ही सही भला न सही
ऐश देहलवी
जो होता आह तिरी आह-ए-बे-असर में असर
ऐश देहलवी
दोस्त जब दिल सा आश्ना ही नहीं
ऐश देहलवी
बातें न किस ने हम को कहीं तेरे वास्ते
ऐश देहलवी
ग़ुबार-ए-जहाँ में छुपे बा-कमालों की सफ़ देखता हूँ
ऐन ताबिश
नज़्म
ऐन रशीद
नाकाम हैं असर से दुआएँ दुआ से हम
अहसन मारहरवी
नाकाम हैं असर से दुआएँ दुआ से हम
अहसन मारहरवी
दिल झुका माइल तबीअत हो गई
अहसन मारहरवी
बाहम जो हुस्न ओ इश्क़ में याराना हो गया
अहसन मारहरवी
ऐ दिल न सुन अफ़्साना किसी शोख़ हसीं का
अहसन मारहरवी
जो जो शुऊर-ए-ज़ेहन पे आता चला गया
अहसन लखनवी
मुझ को ख़ुशियाँ न सही ग़म की कहानी दे दे
अहसन इमाम अहसन
ज़रुरत-ए-इत्तिहाद
अहमक़ फफूँदवी