Islamic Poetry (page 68)
ख़िदमत-ए-वतन
अहमक़ फफूँदवी
इंक़लाब
अहमक़ फफूँदवी
इल्म की ज़रूरत
अहमक़ फफूँदवी
दुआ
अहमक़ फफूँदवी
ये तेरा ख़याल है कि तू है
अहमद ज़फ़र
सियाह रात की हर दिलकशी को भूल गए
अहमद ज़फ़र
अल्लाह वाला एक क़बीला मेरी निस्बत
अहमद शनास
तसव्वुर को जगा रक्खा है उस ने
अहमद शनास
फूलों में एक रंग है आँखों के नीर का
अहमद शनास
है वाहिमों का तमाशा यहाँ वहाँ देखो
अहमद शनास
जागती शब ख़ुदा-हाफ़िज़
अहमद सज्जाद बाबर
मिरे हबीब मिरी मुस्कुराहटों पे न जा
अहमद राही
नज़्म
अहमद राही
कभी हयात का ग़म है कभी तिरा ग़म है
अहमद राही
गर्दिश-ए-जाम नहीं गर्दिश-ए-अय्याम तो है
अहमद राही
मिरे ख़ुदा ने किया था मुझे असीर-ए-बहिश्त
अहमद नदीम क़ासमी
ख़ुदा करे कि तिरी उम्र में गिने जाएँ
अहमद नदीम क़ासमी
ख़ुद को तो 'नदीम' आज़माया
अहमद नदीम क़ासमी
क़रिया-ए-मोहब्बत
अहमद नदीम क़ासमी
पस-ए-आईना
अहमद नदीम क़ासमी
फ़न
अहमद नदीम क़ासमी
दुआ
अहमद नदीम क़ासमी
बीसवीं सदी का इंसान
अहमद नदीम क़ासमी
उम्र भर उस ने इसी तरह लुभाया है मुझे
अहमद नदीम क़ासमी
तंग आ जाते हैं दरिया जो कुहिस्तानों में
अहमद नदीम क़ासमी
शुऊर में कभी एहसास में बसाऊँ उसे
अहमद नदीम क़ासमी
साँस लेना भी सज़ा लगता है
अहमद नदीम क़ासमी
मुदावा हब्स का होने लगा आहिस्ता आहिस्ता
अहमद नदीम क़ासमी
मैं किसी शख़्स से बेज़ार नहीं हो सकता
अहमद नदीम क़ासमी
लबों पे नर्म तबस्सुम रचा के धुल जाएँ
अहमद नदीम क़ासमी