Islamic Poetry (page 70)
जुम्बिश में ज़ुल्फ़-ए-पुर-शिकन एक इस तरफ़ एक उस तरफ़
अहमद हुसैन माइल
हो गए मुज़्तर देखते ही वो हिलती ज़ुल्फ़ें फिरती नज़र हम
अहमद हुसैन माइल
चोरी से दो घड़ी जो नज़ारे हुए तो क्या
अहमद हुसैन माइल
रास्ते में शाम का मुक़द्दर होना
अहमद हमेश
मकाशफ़ा
अहमद हमेश
लैंडस्केप
अहमद हमेश
ख़ाक-ए-बिसात
अहमद हमेश
इस से ज़ियादा कुछ नहीं
अहमद हमेश
दर-अस्ल ये नज़्म लिखी ही नहीं गई
अहमद हमेश
अंदेशा-ए-जाँ
अहमद हमेश
किस का शोअ'ला जल रहा है शो'लगी से मावरा
अहमद हमेश
जहाँ से होता है प्यारे ख़ुदा का नाम शुरूअ'
अहमद हमेश
नित-नए रंग से करता रहा दिल को पामाल
अहमद हमदानी
उम्र भर कौन निभाता है तअल्लुक़ इतना
अहमद फ़राज़
तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा
अहमद फ़राज़
बंदगी हम ने छोड़ दी है 'फ़राज़'
अहमद फ़राज़
अब ज़मीं पर कोई गौतम न मोहम्मद न मसीह
अहमद फ़राज़
तो बेहतर है यही
अहमद फ़राज़
ऐ मेरे वतन के ख़ुश-नवाओ
अहमद फ़राज़
ऐ मेरे सारे लोगो
अहमद फ़राज़
यूँही मर मर के जिएँ वक़्त गुज़ारे जाएँ
अहमद फ़राज़
ये क्या कि सब से बयाँ दिल की हालतें करनी
अहमद फ़राज़
ये आलम शौक़ का देखा न जाए
अहमद फ़राज़
उस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ
अहमद फ़राज़
तरस रहा हूँ मगर तू नज़र न आ मुझ को
अहमद फ़राज़
मिज़ाज हम से ज़ियादा जुदा न था उस का
अहमद फ़राज़
जुज़ तिरे कोई भी दिन रात न जाने मेरे
अहमद फ़राज़
इस से पहले कि बे-वफ़ा हो जाएँ
अहमद फ़राज़
हर कोई दिल की हथेली पे है सहरा रक्खे
अहमद फ़राज़
गिला फ़ुज़ूल था अहद-ए-वफ़ा के होते हुए
अहमद फ़राज़