Islamic Poetry (page 69)
खड़ा था कब से ज़मीं पीठ पर उठाए हुए
अहमद नदीम क़ासमी
जो लोग दुश्मन-ए-जाँ थे वही सहारे थे
अहमद नदीम क़ासमी
जी चाहता है फ़लक पे जाऊँ
अहमद नदीम क़ासमी
हर लम्हा अगर गुरेज़-पा है
अहमद नदीम क़ासमी
इक मोहब्बत के एवज़ अर्ज़-ओ-समा दे दूँगा
अहमद नदीम क़ासमी
अंदाज़ हू-ब-हू तिरी आवाज़-ए-पा का था
अहमद नदीम क़ासमी
अजब सुरूर मिला है मुझे दुआ कर के
अहमद नदीम क़ासमी
दिल में वो शोर न आँखों में वो नम रहता है
अहमद मुश्ताक़
दस्त-ए-सुमूम दस्त-ए-सबा क्यूँ नहीं हुआ
अहमद मुश्ताक़
सवाद-ए-शाम न रंग-ए-सहर को देखते हैं
अहमद महफ़ूज़
सुकूत तोड़ने का एहतिमाम करना चाहिए
अहमद ख़याल
तुम्हारे वस्ल का जिस दिन कोई इम्कान होता है
अहमद कमाल परवाज़ी
तन्हाई से बचाव की सूरत नहीं करूँ
अहमद कमाल परवाज़ी
मैं रंग-ए-आसमाँ कर के सुनहरी छोड़ देता हूँ
अहमद कमाल परवाज़ी
सबा देख इक दिन इधर आन कर के
अहमद जावेद
वाइ'ज़ का ए'तिराज़ ये बुत हैं ख़ुदा नहीं
अहमद हुसैन माइल
मुसलमाँ काफ़िरों में हूँ मुसलामानों में काफ़िर हूँ
अहमद हुसैन माइल
मैं ही मोमिन मैं ही काफ़िर मैं ही काबा मैं ही दैर
अहमद हुसैन माइल
खोल कर ज़ुल्फ़-ए-मुसलसल को पढ़ी उस ने नमाज़
अहमद हुसैन माइल
जा के मैं कू-ए-बुताँ में ये सदा देता हूँ
अहमद हुसैन माइल
है हुक्म-ए-आम इश्क़ अलैहिस-सलाम का
अहमद हुसैन माइल
ज़मज़मा नाला-ए-बुलबुल ठहरे
अहमद हुसैन माइल
वो पारा हूँ मैं जो आग में हूँ वो बर्क़ हूँ जो सहाब में हूँ
अहमद हुसैन माइल
शब-ए-माह में जो पलंग पर मिरे साथ सोए तो क्या हुए
अहमद हुसैन माइल
प्यार अपने पे जो आता है तो क्या करते हैं
अहमद हुसैन माइल
निकली जो रूह हो गए अजज़ा-ए-तन ख़राब
अहमद हुसैन माइल
महशर में चलते चलते करूँगा अदा नमाज़
अहमद हुसैन माइल
क्यूँ शौक़ बढ़ गया रमज़ाँ में सिंगार का
अहमद हुसैन माइल
क्या रोज़-ए-हश्र दूँ तुझे ऐ दाद-गर जवाब
अहमद हुसैन माइल
कोई हसीन है मुख़्तार-ए-कार-ख़ाना-ए-इश्क़
अहमद हुसैन माइल