Love Poetry (page 12)
साहिल के तलबगार भी क्या ख़ूब रहे हैं
इक़बाल कैफ़ी
मोहब्बतों ने बड़ी हेर-फेर कर दी है
इक़बाल कैफ़ी
मौज-ए-बला में रोज़ कोई डूबता रहे
इक़बाल कैफ़ी
बे-कसी पर ज़ुल्म ला-महदूद है
इक़बाल कैफ़ी
वो आ रहे हैं वो जा रहे हैं मिरे तसव्वुर पे छा रहे हैं
इक़बाल हुसैन रिज़वी इक़बाल
टुकड़े टुकड़े मिरा दामान-ए-शकेबाई है
इक़बाल हुसैन रिज़वी इक़बाल
पाता हूँ इज़्तिराब रुख़-ए-पुर-हिजाब में
इक़बाल हुसैन रिज़वी इक़बाल
निगाहों से मेरी निगाहें बचाए
इक़बाल हुसैन रिज़वी इक़बाल
नज़र जिन की उलझ जाती है उन की ज़ुल्फ़-ए-पेचाँ से
इक़बाल हुसैन रिज़वी इक़बाल
मिरी नज़र से जो नज़रें बचाए बैठे हैं
इक़बाल हुसैन रिज़वी इक़बाल
इश्क़ इतना कमाल रखता है
इक़बाल हुसैन रिज़वी इक़बाल
दिल-ए-मुज़्तर को हम कुछ इस तरह समझाए जाते हैं
इक़बाल हुसैन रिज़वी इक़बाल
आँखों को इंतिशार है दिल बे-क़रार है
इक़बाल हुसैन रिज़वी इक़बाल
मर्ग-ए-गुल से पेशतर
इक़बाल हैदर
जो तेरे दर्द हैं वही सब मेरे दर्द हैं
इक़बाल हैदर
बुझ गई दिल की किरन आईना-ए-जाँ टूटा
इक़बाल हैदर
जिस में न कोई रंग न आहंग न ख़ुशबू
इक़बाल अज़ीम
आदमी जान के खाता है मोहब्बत में फ़रेब
इक़बाल अज़ीम
ज़हर के घूँट भी हँस हँस के पिए जाते हैं
इक़बाल अज़ीम
ज़ब्त भी चाहिए ज़र्फ़ भी चाहिए और मोहतात पास-ए-वफ़ा चाहिए
इक़बाल अज़ीम
ये निगाह-ए-शर्म झुकी झुकी ये जबीन-ए-नाज़ धुआँ धुआँ
इक़बाल अज़ीम
वो यूँ मिला कि ब-ज़ाहिर ख़फ़ा ख़फ़ा सा लगा
इक़बाल अज़ीम
नक़्श माज़ी के जो बाक़ी हैं मिटा मत देना
इक़बाल अज़ीम
मुझे अपने ज़ब्त पे नाज़ था सर-ए-बज़्म रात ये क्या हुआ
इक़बाल अज़ीम
माना कि ज़िंदगी से हमें कुछ मिला भी है
इक़बाल अज़ीम
जिस अंजुमन में देखो बेगाने रह गए हैं
इक़बाल अज़ीम
हर-चंद गाम गाम हवादिस सफ़र में हैं
इक़बाल अज़ीम
बिल-एहतिमाम ज़ुल्म की तज्दीद की गई
इक़बाल अज़ीम
ऐ अहल-ए-वफ़ा दाद-ए-जफ़ा क्यूँ नहीं देते
इक़बाल अज़ीम
अब इसे क्या करे कोई आँखों में रौशनी नहीं
इक़बाल अज़ीम