Love Poetry (page 13)
आँखों से नूर दिल से ख़ुशी छीन ली गई
इक़बाल अज़ीम
क़ैद-ए-कौन-ओ-मकान से निकला
इक़बाल अासिफ़
जो हो सके तो कभी इतनी मेहरबानी कर
इक़बाल अासिफ़
बर्ग ठहरे न जब समर ठहरे
इक़बाल अासिफ़
ख़ुद को जब भूल से जाते हैं तो यूँ लगता है
इक़बाल अशहर कुरेशी
सब तमन्नाओं से ख़्वाबों से निकल आए हैं
इक़बाल अशहर कुरेशी
ख़्वाहिश हमारे ख़ून की लबरेज़ अब भी है
इक़बाल अशहर कुरेशी
ख़िज़ाँ का क़र्ज़ तो इक इक दरख़्त पर है यहाँ
इक़बाल अशहर कुरेशी
ठहरी ठहरी सी तबीअत में रवानी आई
इक़बाल अशहर
तेरी बातों को छुपाना नहीं आता मुझ से
इक़बाल अशहर
सभी अपने नज़र आते हैं ब-ज़ाहिर लेकिन
इक़बाल अशहर
प्यास दरिया की निगाहों से छुपा रक्खी है
इक़बाल अशहर
ले गईं दूर बहुत दूर हवाएँ जिस को
इक़बाल अशहर
किसी को खो के पा लिया किसी को पा के खो दिया
इक़बाल अशहर
उर्दू
इक़बाल अशहर
तुम्हारी ख़ुश्बू थी हम-सफ़र तो हमारा लहजा ही दूसरा था
इक़बाल अशहर
ठहरी ठहरी सी तबीअत में रवानी आई
इक़बाल अशहर
तमाशाई बने रहिए तमाशा देखते रहिए
इक़बाल अशहर
सिलसिला ख़त्म हुआ जलने जलाने वाला
इक़बाल अशहर
रास्ता भूल गया एक सितारा अपना
इक़बाल अशहर
रात का पिछ्ला पहर कैसी निशानी दे गया
इक़बाल अशहर
प्यास के बेदार होने का कोई रस्ता न था
इक़बाल अशहर
प्यास दरिया की निगाहों से छुपा रक्खी है
इक़बाल अशहर
कितने भूले हुए नग़्मात सुनाने आए
इक़बाल अशहर
ख़ुदा ने लाज रखी मेरी बे-नवाई की
इक़बाल अशहर
कभी कसक जुदाई की कभी महक विसाल की
इक़बाल अशहर
दयार-ए-दिल में नया नया सा चराग़ कोई जला रहा है
इक़बाल अशहर
भीगी भीगी पलकों पर ये जो इक सितारा है
इक़बाल अशहर
मुझ पर निगाह-ए-गर्दिश-ए-दौराँ नहीं रही
इक़बाल आबिदी
मिले वो दर्स मुझ को ज़िंदगी से
इक़बाल आबिदी