Love Poetry (page 167)
ख़िर्क़ा-पोशी में ख़ुद-नुमाई है
दाऊद औरंगाबादी
जब वो मह-ए-रुख़्सार यकायक नज़र आया
दाऊद औरंगाबादी
जब परी-रू हिजाब करते हैं
दाऊद औरंगाबादी
जब मिला यार तू अग़्यार सेती क्या मतलब
दाऊद औरंगाबादी
इश्क़ ने तुझ ख़ाल के मुझ कूँ ख़याली किया
दाऊद औरंगाबादी
हुस्न इस शम्अ-रू का है गुल-रंग
दाऊद औरंगाबादी
गुलशन-ए-जग में ज़रा रंग-ए-मोहब्बत नीं है
दाऊद औरंगाबादी
दिलबर कूँ इताब ख़ूब है ख़ूब
दाऊद औरंगाबादी
दिल में ख़याल-ए-यार है जासूस की नमत
दाऊद औरंगाबादी
दिल कूँ दिलदार के नियाज़ करे
दाऊद औरंगाबादी
देख लटका सजन तेरी लट का
दाऊद औरंगाबादी
दर्पन दिया हूँ दिल का मैं उस दिलरुबा के हाथ
दाऊद औरंगाबादी
अगर वो गुल-बदन मुझ पास हो जावे तो क्या होवे
दाऊद औरंगाबादी
आतिश-ए-इश्क़ सूँ जो जलता है
दाऊद औरंगाबादी
आज बदली है हवा साक़ी पिला जाम-ए-शराब
दाऊद औरंगाबादी
तुम से अब क्या कहें वो चीज़ है दाग़-ए-ग़म-ए-इश्क़
दत्तात्रिया कैफ़ी
इश्क़ ने जिस दिल पे क़ब्ज़ा कर लिया
दत्तात्रिया कैफ़ी
ज़िंदगी का किस लिए मातम रहे
दत्तात्रिया कैफ़ी
या इलाही मुझ को ये क्या हो गया
दत्तात्रिया कैफ़ी
सूरत-ए-हाल अब तो वो नक़्श-ए-ख़याली हो गया
दत्तात्रिया कैफ़ी
क़िस्मत बुरे किसी के न इस तरह लाए दिन
दत्तात्रिया कैफ़ी
पर्दा-दार हस्ती थी ज़ात के समुंदर में
दत्तात्रिया कैफ़ी
लुत्फ़ हो हश्र में कुछ बात बनाए न बने
दत्तात्रिया कैफ़ी
इश्क़ ही इश्क़ हो आशिक़ हो न माशूक़ जहाँ
दत्तात्रिया कैफ़ी
हुस्न-ए-अज़ल का जल्वा हमारी नज़र में है
दत्तात्रिया कैफ़ी
फ़िदा अल्लाह की ख़िल्क़त पे जिस का जिस्म ओ जाँ होगा
दत्तात्रिया कैफ़ी
इक ख़्वाब का ख़याल है दुनिया कहें जिसे
दत्तात्रिया कैफ़ी
ढूँढने से यूँ तो इस दुनिया में क्या मिलता नहीं
दत्तात्रिया कैफ़ी
ख़ुश-फमी-ए-हुनर ने सँभलने नहीं दिया
दरवेश भारती
जब से किसी से दर्द का रिश्ता नहीं रहा
दरवेश भारती