Love Poetry (page 168)

जब मोहब्बत का किसी शय पे असर हो जाए

दरवेश भारती

दर्द औरों का दिल में गर रखिए

दरवेश भारती

तुम्हारी आँखें

दर्शिका वसानी

तिरे बग़ैर

दर्शिका वसानी

पूरा चाँद

दर्शिका वसानी

क्या वहीं मिलोगे तुम

दर्शिका वसानी

एक और शराबी शाम

दर्शिका वसानी

बुढ़ापे की चोटी

दर्शिका वसानी

भूक में दबे बचपन

दर्शिका वसानी

अश्क मेरे अपने

दर्शिका वसानी

ये किस ने कह दिया आख़िर कि छुप-छुपा के पियो

दर्शन सिंह

वो सलीक़ा हमें जीने का सिखा दे साक़ी

दर्शन सिंह

तुझे क्या ख़बर मिरे हम-सफ़र मिरा मरहला कोई और है

दर्शन सिंह

तमाम नूर-ए-तजल्ली तमाम रंग-ए-चमन

दर्शन सिंह

रक़्स करती है फ़ज़ा वज्द में जाम आया है

दर्शन सिंह

राज़-ए-निहाँ थी ज़िंदगी राज़-ए-निहाँ है आज भी

दर्शन सिंह

क़ैद-ए-ग़म-ए-हयात से अहल-ए-जहाँ मफ़र नहीं

दर्शन सिंह

निगाह-ए-मस्त-ए-साक़ी का सलाम आया तो क्या होगा

दर्शन सिंह

मोहब्बत की मता-ए-जावेदानी ले के आया हूँ

दर्शन सिंह

लिबास-ए-फ़क़्र में हम को जो ख़ाकसार मिले

दर्शन सिंह

किसी की शाम-ए-सादगी सहर का रंग पा गई

दर्शन सिंह

कहीं जमाल-ए-अज़ल हम को रूनुमा न मिला

दर्शन सिंह

कब ख़मोशी को मोहब्बत की ज़बाँ समझा था मैं

दर्शन सिंह

जज़्बा-ए-दिल को अमल में कभी लाओ तो सही

दर्शन सिंह

जब आदमी मुद्दआ-ए-हक़ है तो क्या कहें मुद्दआ' कहाँ है

दर्शन सिंह

इश्क़ शबनम नहीं शरारा है

दर्शन सिंह

इस राह में आते हैं बयाबाँ भी चमन भी

दर्शन सिंह

हँसी गुलों में सितारों में रौशनी न मिली

दर्शन सिंह

गुलों पे ख़ाक-ए-मेहन के सिवा कुछ और नहीं

दर्शन सिंह

ग़म-ए-हयात पे ख़ंदाँ हैं तेरे दीवाने

दर्शन सिंह