Love Poetry (page 169)

दौलत मिली जहान की नाम-ओ-निशाँ मिले

दर्शन सिंह

चश्म-ए-बीना हो तो क़ैद-ए-हरम-ओ-तूर नहीं

दर्शन सिंह

बहुत मुश्किल है तर्क-ए-आरज़ू रब्त-आश्ना हो कर

दर्शन सिंह

आज दिल से दुआ करे कोई

दर्शन सिंह

ज़िंदगी है या कोई तूफ़ान है!

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

रात मज्लिस में तिरे हुस्न के शोले के हुज़ूर

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

कभू रोना कभू हँसना कभू हैरान हो जाना

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

जग में आ कर इधर उधर देखा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

हमें तो बाग़ तुझ बिन ख़ाना-ए-मातम नज़र आया

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

'दर्द' के मिलने से ऐ यार बुरा क्यूँ माना

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

अज़िय्यत मुसीबत मलामत बलाएँ

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

तुझी को जो याँ जल्वा-फ़रमा न देखा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

तोहमत-ए-चंद अपने ज़िम्मे धर चले

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

तेरी गली में मैं न चलूँ और सबा चले

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

रब्त है नाज़-ए-बुताँ को तो मिरी जान के साथ

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

क़त्ल-ए-आशिक़ किसी माशूक़ से कुछ दूर न था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मुझ को तुझ से जो कुछ मोहब्बत है

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मिरा जी है जब तक तिरी जुस्तुजू है

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मदरसा या दैर था या काबा या बुत-ख़ाना था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मदरसा या दैर था या काबा या बुत-ख़ाना था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

जग में आ कर इधर उधर देखा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

इश्क़ हर-चंद मिरी जान सदा खाता है

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

दिल मिरा फिर दुखा दिया किन ने

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

चमन में सुब्ह ये कहती थी हो कर चश्म-ए-तर शबनम

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

बाग़-ए-जहाँ के गुल हैं या ख़ार हैं तो हम हैं

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

अर्ज़-ओ-समा कहाँ तिरी वुसअ'त को पा सके

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

दरिंदे साथ रहना चाहते हैं आदमी के

दानियाल तरीर

तमन्ना का दूसरा क़दम

दानियाल तरीर

संग-ए-बुनियाद

दानियाल तरीर